विश्व के सात आश्चर्यों में से एक-पेट्रा

अपनी अद्वितीय स्थापत्यशैली के कारण जॉर्डन स्थित पेट्रा की गणना विश्व के सात आश्चर्यों में होती है। यह ‘होर’ नामक पहाड़ की ढलान पर पर्वतों के बीच एक संकरी घाटी में स्थित है। ‘होर’ पहाड़ मृत सागर से अकाबा की खाड़ी तक फैली ‘अरबा वादी’ तक फैला है। मूल निवासी नाबातियन इस पुरातन नगर को ‘रेकेम’ के नाम से जानते थे।

सात हज़ार साल पहले पेट्रा व आसपास का क्षेत्र बसा हुआ था। अनुमान है कि नबातियन कबीले के लोग यहाँ पर रहते थे। ई पू . छठी शताब्दी में नबातियों ने इस बंजर रेगिस्तान में अपनी राजधानी स्थापित की थी। गुलाबी चट्टानों से बना होने के कारण इसको ‘गुलाबी शहर’ भी कहा जाता है। पेट्रा शहर की गुलाबी बलुआ पत्थरों से बनी नक्काशीदार भव्य इमारतें, कुशल जल प्रणाली अपने आप में अद्वितीय है। पेट्रा का वैश्विक, सांस्कृतिक मूल्य यहाँ पर स्थित भव्य मकबरों, मंदिरों की स्थापत्य शैली, विशिष्ट धार्मिक स्थलों, बरसाती पानी के संचयन के लिए निर्मित नहरों, बांधों, जलाशयों तथा शहर में पानी की सप्लाई के लिए बलुआ पत्थरों की पाइप लाइनों,तांबे की खदानों, मंदिरों, चर्चों व अन्य सार्वजनिक इमारतों के पुरातत्त्वशेषों के कारण है। इमारतों के बाहरी भाग पर रोमन स्थापत्य शैली की छाप अंकित है। अमूल्य वैश्विक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में यूनेस्को की विश्व विरासत समिति ने इसको 1985ई में विश्व विरासत घोषित कर दिया था। 2007 ई में यहाँ के ‘अल-खजनेह’ को विश्व के सात आश्चर्यों में से एक माना गया।

इतिहास-

नबातियों द्वारा पारम्परिक शैली में चट्टानों को काट कर बनाए गए नक्काशीदार मंदिर, शाही मकबरे व ‘अल-खजनेह’ विशिष्ट हैं। ई पू. पहली शताब्दी से अंतिम शताब्दी तक की अद्भुत स्थापत्यकला व कलात्मक सौन्दर्य मुग्धकारी है। प्रागैतिहासिककाल से मध्यकाल तक की स्थापत्य शैली में निर्मित संरचनाओं,स्मारकों के पुरातत्त्वशेष उन विलुप्त सभ्यताओं के प्रतीक हैं जो यहाँ पर आती रहीं। सदियों तक गुमनामी के अंधेरे में विलीन पेट्रा को ‘विलुप्त नगर’ (The lost city) कहा जाता है।

पुरातत्त्वशेष इस बात की पुष्टि करते हैं कि नबाती कबीले के लोग अत्यधिक सुविधासम्पन्न थे। वे जलप्रणाली के विशेषज्ञ तथा कुशल व्यापारी थे। उनके गाज़ा,बसरा, दमस्कश के साथ व्यापारिक संबंध थे। यह आश्चर्य की बात है कि इतने समृद्ध शहर के अवशेष सदियों तक जनसामान्य की दृष्टि से ओझल रहे। 1812 ई में स्विस अन्वेषक जॉन लुडविग बरकार्ट ने इस विलुप्त शहर को ढूंढ निकाला था। यूनेस्को के विचार में ये संरचनाएँ विश्व की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं। मृत सागर के उत्तरी तट पर कामरान की वादी की ग्यारह गुफाओं में प्राप्त अभिलेखों में इस स्थान का ज़िक्र है। उस समय इस स्थान का नाम ‘रेकेम’ था। इन अभिलेखों में 900 दुर्लभ दस्तावेज़ संरक्षित हैं। इनमें ‘हेब्र्यु’ भाषा में लिखी दुर्लभ बाइबल भी है। ये अभिलेख 1947-1956 के बीच प्राप्त हुए । इतिहासकर इन में लिखी सामग्री का गहन अध्ययन करने में जुटे हैं। उनके मतानुसार इन अभिलेखों में लिखी सामग्री से विश्व के इतिहास में नाटकीय परिवर्तन आने की संभावना है।

इतिहासकारो, पुरातत्त्वविदों के लिए इस शहर का निर्माण काल आज भी एक रहस्य बना हुआ है। इस रहस्य को जानने के लिए उनके पास कोई भी विश्वसनीय प्रमाण नहीं है। हार कर निर्माण काल को निर्धारित करने के लिए उन्होने स्थापत्यशैली का सहारा लिया है। अनेक संरचनाओं में ग्रीक, रोमन तथा सीरियन शैली का प्रभाव परिलक्षित होता है। तत्कालीन स्थानीय स्थापत्य शैली कहीं नहीं दिखाई देती है। यहाँ की मूल सभ्यता का आकलन करने के लिए पुरातत्त्वविद यूनानी सभ्यता के मकबरों को आधार मान कर अध्ययन कर रहे हैं। ये संरचनाएँ प्राचीनतम संरचनाएँ हैं। आकलन के अनुसार ये ई पू. छठी शताब्दी से प्राचीन नहीं हैं।

प्रवेश द्वार-

इस क्षेत्र का प्रवेशद्वार पूर्व में मूसा वादी से है।वहाँ से एक संकरी, अंधेरी खाई से अंदर जाने का रास्ता है। इसके दोनों तरफ ऊंची चट्टानें हैं।इस्लामिक अभिलेखों के अनुसार पेट्रा उस स्थान पर स्थित है जहां पर मूसा नबी ने एक पत्थर पर छड़ी मारी थी और वहाँ से अक्षय जलधारा निकल पड़ी थी । इसी कारण से यह घाटी ‘मूसा वादी’ के नाम से प्रसिद्ध है। यह खाई तीन-चार मीटर चौड़ी तथा एक मील लम्बी है। प्रवेशद्वार बांध से शुरू हो कर ‘अल खजेनह’ तक जाता है। चट्टानों पर दोनों ओर बलुआ पत्थरों से चित्ताकर्षक आकृतियाँ उत्कीर्ण हैं। प्रवेशद्वार के दोनों ओर पानी के लिए पाइप लाइनें बिछी हैं। सिक अर्थात प्रवेश द्वार से बाहर ‘बब-अल-सिक नामक घाटी में वर्गाकार विशाल स्मारक हैं। इन चट्टानों को ‘जिन चट्टानें’ भी कहा जाता है। यहीं पर है ‘ओबेलिस्क समाधि’ (मकबरा)।

अल-खजनेह (कोषागार)

प्रवेशद्वार अर्थात ‘सिक’ यहाँ की सर्वाधिक सुंदर इमारत ‘अल-खजनेह’ तक जाता है। वास्तव में यह एक शाही मकबरा है। स्थानीय अफवाहों के आधार पर इसका नाम ‘अल-खजनेह’ (कोषागार) पड़ गया।

कुछ लोगों ने यह अफवाह फैला दी कि यहाँ पर एक बड़े घड़े में लुटेरों ने लूट का माल छिपा रखा है। इन अफवाहों को सुन कर बेदुइन अरबों ने उस खजाने को पाने के लिए यहाँ पर धावा बोल दिया। घड़े को तोड़ने के लिए अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। उनको शायद इस बात का अहसास नहीं था कि वह एक मजबूत चट्टान से बना हुआ था। आज भी उस स्थान पर गोलियों के निशान मौजूद है।

भव्य मंदिर-

ई पू. पहली शताब्दी के अंत में चित्ताकर्षक,भव्य मंदिर का निर्माण बहुत तेज़ी से हुआ। इस निर्माण कार्य को संभवतः अलेक्ज़ेंडरिया के प्रशिक्षित वास्तुशिल्पियों ने सम्पन्न किया।

मंदिर की चारदीवारी के साथ छह खूबसूरत पगडंडियाँ थीं। ऊपर तीन स्तंभों पर नक्काशीदार तीन हाथियों के सिर सुशोभित थे। मंदिर पर रंगीन प्लास्टर किया था तथा पानी के लिए पाइप लाइनें बिछी हुई थीं।

सम्राट अरेटस चतुर्थ ने पहली शताब्दी के मध्य अनेक संरचनाओं का निर्माण करवाया था। उसी समय संभवतः मंदिर का भी नव निर्माण करवाया हो। मंदिर से स्तंभों वाली गली से बाइजेंटाइन चर्च का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। एक अभिलेख से ज्ञात होता है कि सम्राट अरेटस ने नबातियों के प्रमुख देव ‘दुसरा’ के मंदिर के साथ थियेटर बनाने का भी आदेश दिया था। अतः मंदिर के साथ थियेटर भी निर्मित है। अन्य किसी स्थान पर किसी मंदिर में स्तंभों वाली गली तथा थियेटर निर्मित होने का प्रमाण नहीं मिलता है। कुछ पुरातत्त्वविदों के मतानुसार यहाँ पर मंदिर नहीं अपितु प्रशासनिक कार्यालय थे। जो भी हो पुरातत्त्वविद आज भी इन रहस्यों की गुत्थी सुलझाने में माथा-पच्ची कर रहे हैं।

मठ-

कुछ पुरातत्त्वविदों,व पर्यटकों के विचार में मठ ‘अल खजनेह’ का विस्तीर्ण तथा बेहतर प्रतिरूप है। यहाँ तक पंहुचने के लिए 800 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। पुराने पेट्रा में निर्मित म्यूज़ियम के समीप से मठ तक जाने का मार्ग शुरू हो जाता है। ऊपर जाने के लिए खच्चर,टट्टू मिल जाते हैं। मार्ग के आरंभ में धूल भरी पगडंडियों के पीछे नक्काशीदार मकबरे हैं।

स्तंभों के बीच स्थित गली-

मेहराबदार प्रवेशद्वार के सामने पेट्रा शहर में स्तंभों के बीच अवस्थित गली के पुरातत्त्वशेष प्राप्त हुए हैं। यह पृष्ठभूमि में दीख रहे थियेटर से कस्र-अल बिंत ( Qasr al-Bint) की पुराने बाज़ार तक जाते हैं। मूल संरचना नबातियन शैली का प्रतिनिधित्व करती है। रोमन काल में इसका नवनिर्माण हुआ होगा। यह प्राचीन पेट्रा का प्रमुख बाज़ार होगा। 106 ई में गली की चौड़ाई मीटर कर दी गयी थी।

शाही मकबरे-

भव्य मंदिर के सामने शाही मकबरे हैं। किंवदंतियों के अनुसार यह शहर की व्यापारिक, वाणिज्यकी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। बाइजेंटाइन काल की चौथी,पाँचवीं तथा छठी शताब्दी तक यह स्थान गली के रूप में इस्तेमाल होता रहा। आवाजही की सुविधा को ध्यान में रख कर इस को आयताकार तथा वृत्ताकार में निर्मित किया गया था। मध्य में जलनिकासी के लिए नीचे पाइप लाइने बिछी हुई हैं।

ओपन स्टेडियम-

पुरातत्त्विक दृष्टिकोण से यह संरचना अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है। नबातियन साम्राज्य में सम्राट अरेटस चतुर्थ के शासन काल में पेट्रा सांस्कृतिक तथा राजनैतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। निर्माण कार्य भी पूरे ज़ोर-शोर से चल रहा था। कहते हैं कि ‘हेरोड दी महान’ द्वारा निर्मित थियेटर को देख कर नबातियन सम्राट के मन में भी थियेटर निर्माण का विचार आया। थियेटर के भीतर लगभग 4,000 दर्शकों के बैठने की व्यवस्था थी। डिजाइन के दृष्टिकोण से रोमन दिखाई देने पर भी इस पर नबातियन स्थापत्य शैली की छाप स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। बाद में अरेटस के बेटे मैकस द्वितीय ने इसमें कुछ परिवर्तन करवाया।

धर्म-

ये अमूल्य स्मारक 264 वर्ग कि.मी क्षेत्र में पंक्तिबद्ध रूप से निर्मित हैं। नबाती कबीले के लोगों ने इसको बसाया था। उनकी भाषा ‘आर्मेक’ थी। वे ‘दुशरा’ देवता तथा ‘उज्जा’,’अलत’, व ‘मनह’ नामक तीन देवियों की पूजा करते थे। इनके अतिरिक्त वे अपने सम्राटों की पूजा भी देवरूप में करते थे। उनके पौराणिक आख्यान, सम्राटों के नाम, शासन प्रणाली सब अतीत के गर्भ में विलुप्त हो चुकी है। पाँचवीं शताब्दी में ईसाई मतावलम्बियों ने इस क्षेत्र में प्रवेश किया था। उसके बाद का इतिहास लिखित रूप में उपलब्ध है।

विलुप्त सभ्यता-

363 ई में आए भूकंप में यहाँ की जलप्रणाली नष्ट हो गयी थी। शहर में जलप्राप्ति का कोई साधन नहीं बचा था अतः लोग जीवन-यापन के लिए दूसरे स्थानों पर विस्थापित हो गए थे। सागर मार्ग भी नष्ट हो गया था। परिणाम स्वरूप पेट्रा का व्यापार, सुख-समृद्धि सब विलुप्त हो गया। डाकुओं,लुटेरों ने इसको अपना ठिकाना बना लिया। वे आते और यहाँ से अमूल्य, ऐतिहासिक सम्पदा लूट कर ले जाते। नक्काशीदार ग्रेनाइट पत्थरों से निर्मित कुछ इमारतें ही शेष बची हैं जो पेट्रा के गौरव शाली इतिहास की साक्षी हैं। इस अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर के अवशेषों को प्रतिवर्ष अगणित पर्यटक देखने के लिए आते हैं। कोविड-19 महामारी के चलते आज यहाँ पर सन्नाटा पसरा है।

विश्व साहित्य, लोकमञ्च पर पेट्रा की लोकप्रियता-

सन 1845 में ब्रिटिश कवि विलियम बुरगोन को उनकी कविता ‘पेट्रा’ के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का ‘नौडीगेट’ पुरस्कार मिला था।

पेट्रा का उल्लेख अनेक उपन्यासों यथा-‘Left Behind Series’, ‘ Appointment with Death; ‘ The Eagle in the Sand; ” The Red Sea Sharks’ में मिलता है।

अंग्रेज़ महिला ने पेट्रा बेदुइन के साथ 2004-2013 तक उम सेयहोन में बिताए गए समय को कलमबद्ध किया ।

‘Indiana Jones and the Last Crusade; Arabian Nights; Passion in the Desert; Mortal Combat ; Sinbad and the Eye of the Tigar, फिल्मों में भी पेट्रा के चित्र देखे जा सकते है।

अनेक टी.वी सीरियलों में भी खूबसूरत पेट्रा देखा जा सकता है।

विशेष-

लाल-गुलाबी रंग के पत्थरों से निर्मित ‘गुलाबी सिटी’ पेट्रा के समीप दो अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट-अकाबा एयरपोर्ट तथा वादी अरबा एयरपोर्ट है। जॉर्डन पंहुचने के बाद पेट्रा तक जाने के लिए परिवहन के अनेक विकल्प हैं। अम्मान से पेट्रा तक आने-जाने के लिए पूरे दिन का टिकट लिया जा सकता है। इसके अतिरिक मिनी बसें भी चलती हैं। अम्मान से पेट्रा तक दो घंटे का सफर है। अम्मान में रहने, खाने-पीने की समुचित व्यवस्था है।

पेट्रा के दर्शनीय स्थलों को देखने के लिए प्रातःकाल अथवा शाम का समय सर्वोपयुक्त है। दिन में रेगिस्तान की तपती गर्मी में पर्यटक बेहाल हो जाते हैं। शाम को ढलते सूरज की सतरंगी किरणों की रोशनी में देदीप्यमान नक्काशदार बलुआ पत्थरों की अद्वितीय संरचनाओं को देखने में अलौकिक आनंद आता है। तो क्यों नहीं जीवन में एक बार इस अलौकिक आनंद की अनुभूति की जाए।

=============================

प्रमीला गुप्ता

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.