कीव का भव्य सेंट सोफिया कैथेड्रल व पेचेर्स्क मठ परिसर-

पोलिश तथा रूसी चिरकाल तक यूक्रेन के सीमावर्ती प्रदेश पर आधिपत्य करने के लिए संघर्ष करते रहे। यहाँ की भूमि समतल व उपजाऊ है। पश्चिम में कार्पेथियन पर्वत और दक्षिण में क्रिमियीन प्रायद्वीप है। सदियों तक यह क्षेत्र आवागमन व व्यापार मार्ग के रूप में शाही आकांक्षाओं की आपूर्ति करता रहा। इसका प्रमाण 300 साल पुरानी राजसत्ता से पहले मिलता है। यूक्रेन के हेप्स्बर्ग साम्राज्य के सीमावर्ती नगर, पोलिश किले, तातार महल और काले सागर पर निर्मित पुरातन ग्रीक व जेनोआ की चौकियाँ इस बात की गवाह हैं।

वर्तमान में यूक्रेन अपने पुरातन समृद्ध इतिहास को खंगाल रहा है। इसका सर्वोत्कृष्ट उदाहरण यूक्रेन की राजधानी कीव है। रूसी कीव के वैभवशाली काल ,जब केवल कोंस्टेन्टिपोल का ही बोलबाला था, के बाद 1240 ई में तातारों और बातूखान ने कीव को पूरी तरह से तहस-नहस कर डाला था। उस समय की जनसंख्या तक पंहुचने में कीव को छह सदियाँ लग गयी। इस अवधि में कीव नगर लिथुनियनस,पोलिश तथा रूसी लोगों के साथ संघर्ष करता रहा। बहुत कठिनाई से 20वीं सदी में विश्वयुद्ध की दो विभीषिकाओं से अपने अस्तित्व को बचा पाया। कालचक्र पूरा होने के बाद अब कीव दोबारा भव्य यूरोपीय राजधानी के रूप में अपने आप को स्थापित करने के लिए सतत प्रयत्नशील है।

इतिहास-

कीव का प्रारम्भिक परिदृश्य दो महान सम्राटों–व्लादमीर दी ग्रेट और उसके पुत्र यरोस्ल्व दी वाइज़ के इर्द-गिर्द घूमता है। उनके नाम की दो गलियों के संगमस्थल से ऊपरी नगर की यात्रा आरंभ होती है। यह कीव ओपेरा और बैले थियेटर से एक चौराहे की दूरी पर नगर का पुराना प्रवेशद्वार ‘गोल्डन गेट’ है।

इस प्रवेशद्वार का निर्माण 11वीं सदी में ऊपरी नगर की किलेबंदी के रूप में यरोस्लव ने करवाया था। शिखर पर निर्मित ‘चर्च ऑफ दी अनंसिएशन’ की स्वर्णिम गुंबद के अनुरूप गेट का नाम भी ‘स्वर्णिम गेट’ रखा गया। 1240 ई में तातारों ने चर्च और गेट दोनों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया। 1982 ई में मूल प्रारूप के आधार पर इन का नवनिर्माण किया गया। भीतर स्थित म्यूज़ियम में कीव के पुरातन तथा वर्तमान रूप का मिश्रण देखा जा सकता है।

गोल्डन गेट से वुलित्स्या व्लादिमिरिसका गली के उत्तर में यरोस्लव नगर है। रास्ते में KGB की अनुकृति SBU बिल्डिंग आती है। उससे थोड़ा आगे है ‘सेंट सोफिया कैथेड्रल’। बायीं तरफ कैथेड्रल की सुनहरी तथा हरी मीनारें दिखाई देती हैं। यह यरोस्लव का अद्वितीय, चित्ताकर्षक स्मारक है।

इसका निर्माण पेचेंग कबीले पर विजयप्राप्ति के उपलक्ष्य में करवाया गया था। बेजेंटाइन स्थापत्य शैली में निर्मित कैथेड्रल का प्रारूप और डिजाइन के साथ-साथ नाम भी कांस्टेनटीपोल स्थित हेगीया सोफिया पर आधारित है। यह तत्कालीन रस कीव की प्रभुसंपन्नता व वैभव का प्रतीक है। इसमें बसी है प्रारम्भिक रस कीव की आध्यात्मिक चेतना। यही नहीं यह पूर्वी स्लाव सभ्यता का अमूल्य कोष है। सेंट सोफिया कैथेड्रल, उससे सम्बद्ध संरचनाएँ तथा कीव पेचेर्स्क मठ परिसर- कीव की दो मध्यकालीन उत्कृष्ट संरचनाएँ तथा प्रारम्भिक सांस्कृतिक स्मारक हैं।

सेंट सोफिया कैथेड्रल व अन्य संरचनाएँ-

कीव के ऐतिहासिक केंद्र में स्थित सेंट सोफिया कैथेड्रल 11वीं सदी की आरंभिक कलात्मक स्थापत्यशैली का प्रतिनिधित्व कर रहे भव्य स्मारकों में से एक है। यूक्रेन की राजधानी कीव के प्रमुख ईसाई चर्च के रूप में इसका निर्माण राजकुमार यरोस्लव दी वाइज़ ने स्थानीय निर्माताओं तथा बेजेंटाइन वास्तुशिल्पियों के सहयोग से करवाया था। कैथेड्रल के भीतर राजकुमारों का राज्याभिषेक होता था। यहीं पर वे विदेशी अतिथियों का स्वागत करते तथा संधि प्रस्तावों पर हस्ताक्षर करते थे। कैथेड्रल के भीतर इतिहास लेखन की व्यवस्था थी तथा यरोस्लव द्वारा स्थापित लायब्रेरी है।

सेंट सोफिया कैथेड्रल गिने-चुने क्रूसाकार कैथेड्रलों में से एक है। केंद्र का मुख्य बिन्दु क्रास है। यह गुंबद पर स्थित है। प्रमुख केंद्रीय भाग क्रूसाकार भुजा के बेलनाकार चार मेहराबदार स्तंभों पर अवस्थित है। इस प्रकार की संरचनाओं का बेजेंटाइन शैली में निर्माण 11वीं सदी के अंत में हुआ था। पूर्व-पश्चिम दिशा में कैथेड्रल की लंबाई 41.7 मीटर तथा चौड़ाई उत्तर-दक्षिण में 54.6 मीटर है। कुल 2310 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला है।

सेंट सोफिया के 13 गुंबदों में बनी खिड़कियों से भीतर प्रकाश जाने की व्यवस्था है। बेजेंटाइन चर्चों के इतिहास में इतने गुंबदों का निर्माण उल्लेखनीय है। कैथेड्रल की रूपरेखा पिरामिड के आकार की है।

18वीं सदी के आरंभ में कैथेड्रल का नवनिर्माण किया गया था। बाह्य गैलेरी की संरचनाओं में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन कर उन पर नए भव्य गुंबद निर्मित किए गए।

आंतरिक भाग-

कैथेड्रल का आंतरिक भाग भव्य नक्काशी और भित्तिचित्रों से अलंकृत है। कैथेड्रल के भीतर 271 वर्ग मीटर भाग की नक्काशी आज भी संरक्षित है जबकि मूल नक्काशीदार भाग 640 वर्ग मीटर में फैला है। इसी प्रकार 3,000 वर्ग मीटर में उत्कीर्ण भित्तिचित्र संरक्षित हैं जबकि आरंभ में वे 6,000 वर्ग मीटर में फैले थे।

कैथेड्रल के केंद्र में क्राइस्ट -प्रेटोक्रेटर की चित्ताकर्षक प्रतिमा है, उनके साथ चार दिव्य देवदूतों की प्रतिमाएँ हैं।

कैथेड्रल के आंतरिक भाग, अन्य भित्तिचित्रों तथा नक्काशी में ‘ओरण्टा’ (प्रार्थना में लीन वर्जिन) का भव्य चित्रण है। प्रतिमा छह फुट ऊंची है। ऊंचे चबूतरे पर स्थित बहुमूल्य रत्नों से अलंकृत प्रतिमा ने अपने दोनों हाथ ऊपर कर रखे हैं। नीले रंग का परिधान,सोने में लिपटा जामुनी रंग का शाल और लाल बूट पहन रखे हैं।कैथेड्रल में उत्कीर्ण चित्रों के मध्य ‘ओरण्टा’ का चित्र विशिष्ट भव्यता के साथ स्मारिका के रूप में खूबसूरत रंगों में चित्रित है।

सेंट सोफिया कैथेड्रल से बाहर आने का मार्ग 18वीं सदी में निर्मित बेल टावर से है। बायीं तरफ कुलपति व्लादमीर की समाधि तथा नव निर्मित स्क्वेयर के समीप है बेल टावर।

स्क्वेयर के मध्य 1888 ई में निर्मित अश्वारोही बोगदान ख्मोलिंसिकी की प्रतिमा स्थित है।

अपने पोते महान व्लादमीर के सिंहासनारूढ़ होने से 33 साल पहले राजकुमारी ओल्हा ने गुप्त रूप से ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया था। 77 वर्ष बाद सफ़ेद संगमरमर से बनी राजकुमारी ओल्हा की प्रतिमा 1996 ई में स्क्वेयर में स्थापित की गयी। उसके साथ सेंट काइरिल,मेथोडियस तथा एंड्रयू की प्रतिमाएँ हैं।

ये प्रतिमाएँ नवनिर्मित बेल टावर और सेंट माइकेल कैथेड्रल की नूतन स्वर्णिम गुंबंदों के साथ स्थित हैं। 1937 ई में निर्मित इस स्क्वेयर में अब यूक्रेन का विदेश मंत्रालय स्थित ई।

मंत्रालय के बायीं तरफ व्लादमीर शहर है। व्लादमीर ‘महान’ ने सर्वप्रथम 10वीं शताब्दी में ईसाई धर्म को राजकीय धर्म घोषित किया था तथा ‘टिथे चर्च’ की स्थापना की थी। आय का दसवां भाग चर्च के निर्माण के लिए अनुदान स्वरूप देने के कारण चर्च का नाम ‘टिथे’ पड़ गया। यह रस कीव का पत्थरों से निर्मित पहला चर्च था। टिथे चर्च की स्थापना 989 ई में हुई थी। यहीं पर व्लादमीर की समाधि है।

एंड्रयू पहाड़ी पर निर्मित हमनाम सेंट एंड्रयू चर्च का भव्य डिजाइन इटली के प्रख्यात वास्तुकार रस्ट्रेली ने तैयार किया था। 18वीं सदी में सेंट पिटसबर्ग का डिजाइन भी उसी ने तैयार किया था।

यहाँ पर कीव की खूबसूरत , लोकप्रिय गलियाँ हैं। यह कलाकारों का प्रिय स्थान है तथा कैफ़े , स्मृतिचिन्ह खरीदने के लिए सर्वोत्तम स्थान है।

पेचेर्स्क मठ परिसर-

कीव नगर के केंद्र से लगभग 3 कि.मी दूर पेचेर्स्क मठ परिसर है। यहाँ पर 1051ई में स्थापित चर्च, गुफाएँ तथा संग्रहालय है। इस मनोरम स्थल का भ्रमण करने के लिए पूरा दिन भी कम है। यहाँ पर यूरोपीय स्क्वेयर से रास्ता जाता है। रास्ते में यूक्रेन की सुप्रीम काउंसिल का भवन है। उसके पीछे बराक शैली में निर्मित मेरिन्स्की राजप्रासाद है। ज़ार एलेक्ज़ेंडर द्वितीय और साम्राज्ञी मारिया के स्वागत के लिए 1868 ई में इसको नया रंग-रूप प्रदान किया गया था।

अरसेनलना मेट्रो स्टेशन के समीप है ‘जनवरी क्रान्ति स्ट्रीट’। यह स्ट्रीट मठ परिसर तक जाती है। मठ परिसर इनिपरो नदी तक फैला है। जंगलों से ढकी ढलानों पर ऊंचा सिर किए गुंबदों तथा मीनारों का समूह कीव की सर्वोत्कृष्ट, अविस्मरणीय दृश्यावली है। भूमि के नीचे मार्गों, चर्चों तथा गुफाओं के कारण इस स्थान का नाम पेचेर्स्क पड़ गया। 13वीं शताब्दी में तातारों के आक्रमण में मठ लगभग नष्ट हो गया था। फिर भी मध्यकाल में यह ओर्थोडोक्स ईसाई समुदाय का महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थल के रूप में पर्यटन केंद्र रहा। 18वीं शताब्दी में यूक्रेनियन बराक शैली में इसका नवनिर्माण किया गया।

मठ के ऊपरी भाग का प्रमुख प्रवेशद्वार भव्य अलंकृत ‘ट्रिनिटी चर्च से हो कर जाता है।

भीतर कैथेड्रल ऑफ एजंप्शन का 96 मीटर ऊंचा बेल टावर है। यहाँ से बायीं तरफ इनिपरो नदी के तट की मनमोहक दृश्यावली दिखाई देती है।दायीं तरफ ‘माँ मातृभूमि’ की विशाल स्मारिका है। द्वितीय विश्व युद्ध में कीव स्थित यूक्रेन म्यूज़ियम ऑफ हिस्ट्री में प्रदर्शित यह 62 मीटर ऊंची स्टील की विशाल प्रतिमा है। वज़न 560 टन है। माँ मातृभूमि प्रतिमा के दायें हाथ में तलवार तथा बायें हाथ में ढाल जिस पर सोवियत यूनियन का प्रतीक चिन्ह अंकित है।

स्मारक के संबंध में विवादास्पद विचार हैं लेकिन यह निर्विवाद तथ्य है कि एलिवेटर से ऊपर जाने के बाद दीखने वाली दृश्यावली अविस्मरणीय है। बेल टावर के साथ कैथेड्रल का भी नव निर्माण किया गया है।

सेंट निकोलास चर्च-

सेंट निकोलास चर्च कीव का दूसरा रोमन कैथोलिक चर्च है। इस समय इस भवन में रोमन कैथोलिक चर्च के अतिरिक्त ‘नेशनल हाउस ऑफ ऑर्गन एंड चैंबर म्यूज़िक’ भी विद्यमान है। कैथेड्रल का भ्रमण करते समय वहाँ पर संगीत प्रस्तुति मन को आनंदित कर देती है।

कीव नगर के केंद्र में स्थित पेजेज़्हन स्ट्रीट पैदल भ्रमण करने के लिए सर्वोत्तम स्थान है। आधुनिक शान-ओ-शौकत, शानदार प्लेग्राउंड , नयी आकृतियों में बिछी बेंचें, समकालीन सुन्दर प्रतिमाएँ स्ट्रीट को मनोहारी रूप प्रदान कर रही हैं। स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी विशिष्ट आकर्षण का केंद्र हैं। भ्रमण करते समय परिदेश जैसी अलौकिक अनुभूति होती है।

विशेष-

प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर विश्व धरोहर कीव नगर का भ्रमण स्वयं में सुखद, रोमांचक अनुभूति है। प्रमुख यूरोपीयन हवाई उड़ानें -आस्ट्रियन,के.एल.एम, ब्रिटिश एयरवेज, लुफ्तहंसा नियमित रूप से कीव जाती हैं। अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट एयर यूक्रेन सभी यूरोपीय नगरों से जुड़ा है। इसलिए कीव पूरे विश्व के साथ सम्बद्ध है। कीव में बजट के अनुरूप खान-पान एवं आवास की सुविधा है। सर्दियों में जाते समय पर्याप्त गर्म कपड़े ले जाने अत्यावश्यक हैं।

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प्रमीला गुप्ता।

दंबूला के गुफा मंदिर (श्री लंका)

श्री लंका की राजधानी कोलम्बो से 150 कि.मी दूर स्थित दंबूला के गुफा मंदिर ‘दंबूला के स्वर्ण मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हैं।यह श्रीलंका का सर्वाधिक विस्तृत एवं संरक्षित गुफा मंदिर परिसर है। यह समीपवर्ती समतल क्षेत्र से 160 मीटर ऊंची चट्टान पर अवस्थित है। चट्टान के आसपास लगभग 90 गुफाएँ हैं। प्रमुख आकर्षण का केंद्र पाँच गुफाएँ हैं। ये अपनी स्थापत्यशैली तथा भित्तिचित्रों के कारण विश्वविख्यात हैं। इनमें निर्मित प्रतिमाएँ एवं भित्तिचित्र भगवान बुद्ध के जीवन से सम्बद्ध हैं। इन गुफाओं में भगवान बुद्ध की 153 प्रतिमाएँ, श्री लंका के तीन सम्राटों तथा चार अन्य देवी-देवताओं, जिन में विष्णु व गणेश की प्रतिमाएँ भी सम्मिलित हैं, स्थित हैं। गुफाओं के विभिन्न भागों में लगभग 2100 वर्ग मीटर में दानव ‘मरा’ की माया तथा भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश को आकर्षक रूप में उत्कीर्ण किया गया गया है।

दंबूला का भव्य स्वर्ण मंदिर-

इतिहास एवं निर्माण-

श्रीलंका में बौद्धधर्म के प्रवेश से पहले प्रागैतिहासिक काल में इन गुफाओं में श्री लंका के मूलवासियों के रहने के प्रमाण उपलब्ध हैं। दंबूला गुफा परिसर के समीप के ईबंकटुवा क्षेत्र में प्राप्त 2700 साल पुराने नरकंकाल इस के साक्षी हैं।

यह गुफा मंदिर परिसर ई.पू पहली शताब्दी में अस्तित्व में आया था। इस मंदिर परिसर के सर्वाधिक चित्ताकर्षक गुफाएँ झुकी हुई चट्टानों के भीतर अवस्थित हैं। इनमें असंख्य भव्य नक्काशीदार भित्तिचित्र उत्कीर्ण हैं। इनके अतिरिक्त 1938 ई में स्थापित मेहराबदार स्तंभों तथा भव्य प्रवेशद्वार ने इनके सौंदर्य में अत्यधिक वृद्धि कर दी है। गुफाओं के आंतरिक भाग, विशेषरूप से छतों पर, में धार्मिक चित्र उत्कीर्ण हैं। इनमें भगवान बुद्ध, बोधिसत्वों के साथ-साथ अन्य देवी-देवताओं का चित्रांकन भी है। भगवान बुद्ध को विशेष रूप से प्रतिष्ठित करने के कारण ये गुफाएँ बौद्ध विहार कहलाती हैं।

पाँच गुफाएँ-

मंदिर में विभिन्न आकार की पाँच भव्य गुफाएँ हैं। अनुराधापुर व पोलोनरुवा साम्राज्य के अंतर्गत निर्मित ये गुफाएँ श्री लंका में स्थित अनेक गुफा मंदिरों में सर्वाधिक भव्य तथा चित्ताकर्षक हैं। ये 150 मीटर ऊंची चट्टान पर स्थित है। यहाँ जाने के लिए दंबूला चट्टान के ढलुआं रास्ते से हो कर गुजरना पड़ता है। चारों तरफ की मनमोहक दृश्यावली, 19 कि.मी दूर स्थित सिगिरिया के किले का आकर्षक दृश्य देख कर पर्यटक मंत्रमुग्ध रह जाते हैं। साँझ के झुटपुटे में असंख्य पक्षी गुफा के प्रवेश द्वार पर आ बैठते हैं। सबसे बड़ी गुफा पूर्व से पश्चिम तक 52 मीटर लम्बी, प्रवेशद्वार से पीछे तक 23 मीटर चौड़ी और सर्वाधिक ऊंचाई 7 मीटर है। इनमें वालागम्बा, निशंक मला एवं भगवान बुद्ध के प्रिय शिष्य आनन्द का भी चित्रण है।

गुफा 1-दैवी सम्राट गुफा-

देवराज गुफा ‘दैवी सम्राट गुफा’ के नाम से प्रसिद्ध है पहली गुफा। प्रवेश द्वार पर लिखित पहली शताब्दी के ब्राह्मी अभिलेख में इसका निर्माण काल पहली शताब्दी है। इस गुफा में चट्टान काट कर भगवान बुद्ध की 14 मीटर लम्बी लेटी हुई प्रतिमा प्रतिष्ठित है। बुद्ध के चरणों में उनके प्रिय शिष्य आनन्द तथा सिर की ओर विष्णु की प्रतिमा है। माना जाता है कि इन की दैवी शक्तियों से ही इस गुफा निर्माण हुआ था। अनेक बार इस में रंग-रोगन हुआ। अंतिम बार संभवतः 20वीं सदी में पेंट हुआ था।

गुफा 2, महान सम्राटों की गुफा-

यह इस परिसर की सबसे बड़ी गुफा है। इस के भीतर भगवान बुद्ध की विभिन्न मुद्राओं में 56 प्रतिमाएँ हैं। इनके अतिरिक्त सम्राट तथा विष्णु की प्रतिमाएँ भी है। श्रद्धालु इन पर पुष्पमाल अर्पण करते हैं। ई.पू पहली शताब्दी में विहार को प्रतिष्ठित करने वाले सम्राट वत्तागामिनी अभय, 12वीं शताब्दी में 50 प्रतिमाओं को स्वर्णमंडित करवाने वाले सम्राट निशंक मला की प्रतिमाएँ भी स्थित हैं। इसी कारण से इस गुफा को ‘महान सम्राटों की गुफा’ अथवा ‘महाराजा गुफा’ कहा जाता है। चट्टान को काट कर बनाई गयी गुफा में भगवान बुद्ध की बायीं तरफ बोधिसत्व मैत्रेय तथा अवलोकितेश्वर की काष्ठ प्रतिमाएँ हैं। यहाँ पर एक झरना भी है जिससे पानी टपकता रहता है। कहा जाता है कि पानी में चिकित्सकीय गुण विद्यमान हैं। गुफा की छत पर 18वीं सदी में भगवान बुद्ध के जीवन से सम्बद्ध चित्र उत्कीर्ण हैं। कुछ चित्रों में देश के इतिहास की महत्त्वपूर्ण घटनाओं का भी चित्रण है।

गुफा 3,महा अलूत विहार अथवा महान बौद्ध विहार-

प्रख्यात बौद्ध पुनरुद्धारक सम्राट किर्ति राज सिंह के शासनकाल में पारम्परिक कैंडी शैली में छत तथा दीवारों पर चित्रांकन किया गया था। भगवान बुद्ध की 50 प्रतिमाओं के अतिरिक्त यहाँ पर सम्राट की प्रतिमा भी स्थित है। मंदिर के इन कक्षों में सिंहला मूर्ति कला तथा सिंहल कला के कई युगों का इतिहास निहित है। भगवान बुद्ध की प्रतिमाएँ विभिन्न आकार व मुद्राओं में निर्मित हैं। सबसे ऊंची प्रतिमा की ऊंचाई 15 मीटर है। एक गुफा की छत पर बुद्ध के 1500 चित्र उत्कीर्ण हैं।

गुफा 4,5 पश्चिम विहार एवं देविना अलूत विहार-

ये दोनों गुफाएँ पहली तीन गुफाओं की अपेक्षा छोटी हैं तथापि दोनों ही गुफाओं की स्थापत्य कला अद्वितीय हैं। दोनों की आंतरिक साज-सज्जा व भगवान बुद्ध की प्रतिमाएँ दर्शनीय हैं।

संरक्षण-

विशिष्ट स्थापत्यशैली एवं कला के कारण 1991 ई में इस ऐतिहासिक परिसर को यूनेस्को की विश्व विरासत समिति ने इसको विश्व विरासत के रूप में मान्यता प्रदान कर दी थी। विश्व विरासत घोषित किए जाने के बाद इसके संरक्षण व संवर्धन में तीव्रता से विकास हुआ। इस परिसर को अधिकाधिक वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित और आकर्षक बनाए रखने के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। भित्तिचित्रों के संरक्षण पर अधिक बल दिया जा रहा है। 1960 के दशक में इन भित्तिचित्रों की साफ-सफाई करवायी गयी थी। 1930 के दशक में निर्मित संरचनाओं पर 1982 के बाद अधिक ध्यान केन्द्रित किया गया। इस परियोजना में श्री लंका की विभिन्न एजेंसियों के साथ यूनेस्को महत्त्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर रहा है।

दंबूला गुफा मंदिर परिसर सदैव धार्मिक स्थल के रूप में सक्रिय रहा है। दर्शनीय हैं बौद्ध भिक्षुओं की चित्ताकर्षक प्रतिमाएँ-

यूनेस्को द्वारा निर्धारित विश्व विरासत के मानकों की आपूर्ति करने के विचार से विभिन्न संरक्षण परियोजनाओं के अंतर्गत इसके अवसंरचनात्मक विकास पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया गया है। इस परिसर को आकर्षक बनाने के लिए विश्वस्तरीय प्रकाश की व्यवस्था की गयी वहीं पर्यटकों के लिए संग्रहालय तथा सुविधा केंद्र भी स्थापित किए गए।

यहाँ स्थित पुरातात्त्विक संरचनाओं को सुरक्षित रखने के विचार से वर्ष 2003 में यूनेस्को की निरीक्षण टीम ने परिसर के संरक्षित भाग की वृद्धि करने का प्रस्ताव रखा था। बाद की परियोजनाओं के अंतर्गत गुफाओं व अन्य स्थानों की साफ-सफाई की अपेक्षा इस परिसर को मानवीय एवं पर्यावरणीय क्षति से सुरक्षित रखने पर अधिक बल दिया गया। मंदिर तक पंहुचने के लिए 360 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं-

मंदिर के प्रवेश द्वार के समीप पंहुचते ही पर्यटक वहाँ की मुग्धकारी दृश्यावली को देख कर सारी थकान भूल जाते हैं।

अन्य दर्शनीय स्थल-

विश्व विरासत स्वर्ण मंदिर के अतिरिक्त भी दंबूला में कई अन्य दर्शनीय स्थल हैं।

नाग केसर वन (Iron Wood Forest)

किंवदंती के अनुसार नागकेसर वन (Iron Wood Forest) में 10वीं सदी में सम्राट दपूला ने एक पूजा स्थल का निर्माण करवाया था। इसे ‘जथिका नमल उयना’ भी कहते हैं। श्री लंका के राष्ट्रीय वृक्ष ‘ना’ के इस घने वन में ट्रेकिंग का सुंदर मार्ग है। पर्यावरण के दृष्टिकोण से वन अतीव महत्त्वपूर्ण है। पर्यावरणविदों तथा प्रकृति के शोधार्थियों के लिए यह अध्ययन का विषय है।

गुलाबी पत्थरों का पहाड़ (Pink-Quartz Mountain)-

गुलाबी पत्थरों का पर्वत लगभग 500 मिलियन पुरानी पर्वत शृंखला है। यहाँ पर सफ़ेद गुलाबी तथा जामुनी रंग के पत्थरों का संग्रह है। दक्षिण एशिया की सर्वोच्च पर्वत शृंखला के शिखर पर पैदल चढ़ कर पर्यटक मीलों दूर की मुग्धकारी दृश्यावली का आनंद लेने के लिए आते हैं। गुलाबी पत्थरों का होने पर भी इस को उस रूप में पहचान पाना कठिन है।

रनगिरि दंबूला अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम-

दंबूला के समीप मध्य प्रांत में दंबूला मंदिर से अधिग्रहीत 60 एकड़ भूमि पर निर्मित है ‘रनगिरि दंबूला अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम’। इस में 16,800 दर्शकों के बैठने की व्यवस्था है। यहाँ से दंबूला टैंक और दंबूला चट्टान दिखाई देती है। स्टेडियम का निर्माण कार्य रिकार्ड 167 दिनों में पूरा हो गया था। मार्च,2000 में श्रीलंका व इंग्लैंड के बीच एक दिवसीय क्रिकेट मैच से इसका शुभारंभ हुआ था। 2003 ई में यहाँ पर फ़्लडलाइट्स लगाई गयी।

विशेष-

बंदरनायके अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, कटुनयका पूरे विश्व के साथ जुड़ा हुआ है। यहाँ से दंबूला जाने के लिए सुविधापूर्वक बस अथवा टैक्सी मिल जाती है। दंबूला श्रीलंका के प्रमुख नगरों से सड़क मार्ग से जुड़ा है। यह श्रीलंका की राजधानी कोलम्बो के समीप है अतः कोलम्बो अथवा कैंडी से किराए पर कार ले कर जाना एक बेहतर विकल्प है।

मई-अगस्त, अक्तूबर-जनवरी की वर्षा ऋतु को छोड़ कर बाकी समय यहाँ की यात्रा सुखद है। दंबूला में विशाल, अत्याधुनिक मार्केट है। गलियों में बाइसिकलों, कृषि उपकरणों, घर में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों व अन्य सामान का ढेर देखा जा सकता है।

वास्तव में दंबूला गुफाओं की सैर स्वयं में ‘एक पंथ दो काज’ है। प्रकृति के संसर्ग में कला, सौंदर्य की अनुभूति।

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प्रमीला गुप्ता

A Mother and The Three Sons

Beautiful and meaning ful story. Imyself 78 years old and understand the feelings of mother. congratulations.

Kamal's Blogging Café

-Kamal Shrestha, 25 July 2020; shyresk@gmail.com

There was a small family living in a countryside area— a mother and three sons. The mother was so much loving and caring to them. She grew them well and had given a good education. Once they had received their degree from the university, they left home in search of good job opportunities in the biggest city.

They found good careers for them as they had expected there in the biggest city. They were very honest and hardworking guys. They invested their full time in the business of a company. So they were able to expand the business of the company worldwide soon. They received numerous awards and prizes. Their life were full of happiness, excitement and prosperous one touching the height of success as sky-crapper buildings.

So many years after, they became rich and prestigious people in the world and thought to have…

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Author’s Note : Journey so Far

इतने कम समय में इतनी उपलब्धियां।!साहित्य के शीर्ष पुरुष बनो, हार्दिक शुभकामनाएँ।

The Thinking Pen

Here I am, feeling ecstatic, overwhelmed and nervous while writing this post. I started this blog because writing is my emotional outlet and I needed a place to vent my thoughts. I never thought that I will receive this kind of outreach or appreciation for my thoughts. Its been almost two months, I started this blog on the night of 12th may and I remember every single detail that I had planned about this.

17 posts, 8 award nominations, and countless reblogs later, I stand before you. Dear readers, this post is for you. A big thank you to the 500+ readers who became a part of my journey.

So, what makes this blog special for me. I love reading. I was completely new to the WordPress platform and it was here that I found a new perspective to explore. I have connected with people around the world, and…

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पुराने क्यूबेक का ऐतिहासिक डिस्ट्रिक्ट

चारदीवारी से घिरा यह क्षेत्र पुरातन क्यूबेक के इतिहास का जीवंत साक्षी है। सभी संरचनाएँ चित्ताकर्षक व दर्शनीय हैं। संकरी, आड़ी-तिरछी गालियां पुराने चौराहे, स्मारक, भव्य चर्च। इनमें 1632 ई में निर्मित उत्तरी अमेरिका का पत्थरों से बना चर्च भी है। भवन यूरोप की मध्यकालीन स्थापत्यशैली में निर्मित हैं।

पुरातन क्यूबेक क्यूबेक नगर का ऐतिहासिक डिस्ट्रिक्ट है। 1985 ई में यूनेस्को ने इसको विश्व विरासत के रूप में मान्यता प्रदान कर दी थी। उस समय यह ‘अमेरिका की फ्रेंच सभ्यता का पालना’, ‘चारदीवारी से घिरा शहर’, ‘गहमा-गहमी वाला शहर’ के नाम से प्रसिद्ध था। उत्तरी अमेरिका के एक तिहाई भाग में स्थित क्यूबेक शहर ‘नए फ्रांस’ का प्रशासनिक केंद्र एवं नागरिक, न्याय व्यवस्था, धार्मिक सेवाओं का प्रमुख स्थल था। आक्रमणों।युद्धों, आर्थिक जीवन की उठा-पटक के बीच भी क्यूबेक राजधानी के रूप में कार्य करता रहा। कठिन समय में भी अपनी जीवनशक्ति को संरक्षित रखा और अपनी विरासत को विकसित किया। यहाँ के निवासी अपनी विरासत को सहेजने में गौरव का अनुभव करते हैं। पुरातन क्यूबेक नगरीय विरासत एवं पर्यावरण संरक्षण का अद्वितीय उदाहरण है।

इतिहास-

1535 ई में जैक्स कार्टियर के असफल अभियान के बाद 16वीं सदी में सैम्यूल-द-चेपलेन ने 3 जुलाई, 1608 ई में केप डायमंड पर पहला कदम रखा और सेंट लारेंस नदी के सामने सीधी पहाड़ी पर बस्ती बसाने का फैसला किया। 1620 ई में चेपलेन ने केप डायमंड के ऊपर पहला किला सेंट लुई निर्मित करवाया। इसके चारों तरफ लकड़ी की चारदीवारी थी। 1620-1745 ई के मध्य अंतरीप तथा नदी के मुहाने पर काष्ठ, मिट्टी,पत्थरों से अनेक सुरक्षात्मक संरचनाएँ निर्मित हुई।

वर्तमान किलेबंदी का निर्माण नए फ्रांस के चीफ इंजीनियर द्वारा 1716 ई में तैयार प्रारूप के आधार पर 1745 ई में प्रारम्भ हुआ था। चारदीवारी से बाहर अब्राहम मैदान में 1759 ई में फ्रेंच तथा ब्रिटिश फौजों के बीच युद्ध हुआ। क्यूबेक पर ब्रिटेन का अधिकार हो गया। उस समय तक चारदीवारी बन चुकी थी। बाद में ब्रिटिश इंजीनियर्स ने बुर्ज, निरीक्षण के लिए चार मारटेल गुंबदों का निर्माण करवाया। 1806-1808 के मध्य एक अस्थायी किले का निर्माण हुआ तथा 1820-1831 ई के मध्य इंजीनियर इलियास वाकर डर्नफोर्ड के निरीक्षण में स्थायी किला निर्मित हुआ।

नगर का विकास निरंतर हो रहा था अतः किलेबंदी को ढहाने का दबाव बढ़ने लगा। 1871 ई में ब्रिटिश सेना के वापिस जाते ही यह काम शुरू हो गया। पुराने नगर में जाने वाले मार्ग को सुविधाजनक बनाने के लिए कुछ प्रवेशद्वारों व बाहरी भाग को तोड़ा गया लेकिन नए गवर्नर जनरल लॉर्ड डफरिन के आते ही तोड़-फोड़ बंद हो गयी। उसने किलेबंदी का संरक्षण तथा विकास आरंभ कर दिया। सैन्य विरासत तथा नगर के सौंदर्य से मुग्ध हो कर उसने किले के साथ-साथ चलने का मार्ग तथा दोनों तरफ पार्क बनवाए गए। तोड़े गए प्रवेशद्वारों का पुनर्निर्माण व डरहम टेरेस का विस्तार किले तक करवा दिया। जनसामान्य ने लॉर्ड डफरिन के कार्यों की खुल कर प्रशंसा की।

1928 ई में क्यूबेक की प्रांतीय सरकार ने क्यूबेक के संरक्षण, संवर्धन के लिए एक समिति गठित की। इसमें पुरातन क्यूबेक की स्थापत्य धरोहर के लिए विशेष प्रावधान था। पर्यटन की अपार संभावनाओं तथा विकास के दृष्टिकोण से यह निर्णय लिया गया था। परिणाम आशाजनक थे।

1960 ई में प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे उत्तरदायित्व के साथ काम किया। 1963 ई में पुरातन क्यूबेक को ऐतिहासिक डिस्ट्रिक्ट घोषित कर दिया गया। 1972 ई में रॉयल पैलेस का पुनर्निर्माण तथा 1985 ई में ‘म्यूज़ियम ऑफ सिविलाइज़ेशन’ स्थापित किया गया। पुनर्निर्माण व जीर्णोद्धार के कारण पुरातन क्यूबेक की दृश्यावली, संकरी गलियाँ, सार्वजनिक स्थल पुनः जीवंत हो उठे थे। सार्वजनिक निवेश के कारण पुरातन की धरोहर के विकास में नूतन ऊर्जा उत्पन्न हो गयी थी।

पिछले चार सौ वर्षों में पुरातन क्यूबेक को अनेक विकास प्रक्रियाओं में से गुजरना पड़ा। यह विकासचक्र आज भी गतिमान है। किलेबंदी, प्रवेशद्वारों, चेत्यू फ़्रांटनेक, टावर का गिराया जाना दुर्भाग्यपूर्ण था। इस पर भी यहाँ की जनता ने सहयोगी भागीदारों की सहायता से पुरातन क्यूबेक को संरक्षित किया। आज यह विरासत अतीत की अपेक्षा अधिक बेहतर है तथा आने वाले दिनों में ज़्यादा बेहतर होने की संभावना है।

वर्तमान में पुरातन क्यूबेक नगर का क्षेत्र विस्तीर्ण हो गया है लेकिन मूल नगर में 5,000 लोग रहते हैं। आज भी वहाँ पर पुरातन सभ्यता,संस्कृति अपने मूलरूप में संरक्षित है। प्रतिवर्ष 12 लाख विदेशी पर्यटक इस मनोरम स्थल पर घूमने-फिरने तथा यहाँ के अतीत में झाँकने के लिए आते हैं। अनेक पर्यटक तो क्रूज जहाजों से आते हैं।

चित्ताकर्षक दृश्यावली के कारण यह कैनेडा का सर्वाधिकबैठ कर लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। घोड़ागाड़ी में बैठ कर नगर के चारों तरफ 4.6 कि मी लम्बी चारदीवारी की सैर का आनंद लेना अविस्मरणीय अनुभूति है। परकोटों पर खड़े हो कर यहाँ से नीचे संकरी गलियों और मकानों की ढलुआं छतों का दृश्य देखा जा सकता है।

नदी के साथ पुरातन क्यूबेक का बेस विले (लोअर टाउन) है। यह नगर का सबसे पुराना भाग है। यहाँ पर 16वीं तथा 17वीं शताब्दी में निर्मित चित्ताकर्षक संरचनाएँ हैं। 1608 ई में सैम्यूल-द-चेपलेन ने नए फ्रांस की नींव रखी थी। इन संरचनाओं का नवनिर्माण किया गया है। चट्टान तथा नदी के तट पर अनेक दुकानें व रेस्टौरेंट हैं। 1879 ई से चल रही काँच के एलिवेटर फनीक्यूलर से भी ऊपर नीचे जाया जा सकता है।

म्यूज़ियम-

पुरातन क्यूबेक के नवनिर्मित क्षेत्रों में 27 म्यूज़ियम हैं। अधिकांश दर्शनीय स्थान अपर टाउन तथा लोअर टाउन में ही हैं। लोअर टाउन का ‘म्यूज़ियम ऑफ सिविलाइज़ेशन’ विशिष्ट रूप से दर्शनीय है।

म्यूज़ियम ऑफ सिविलाइज़ेशन में क्यूबेक के प्रांतीय इतिहास के साथ-साथ विश्व की अन्य सभ्यताओं की शिल्पाकृतियाँ संग्रहीत हैं।यहाँ पर पारस्परिक गतिविधियों के माध्यम से सभी आयु वर्ग के लोगों को शिक्षण दिया जाता है। भूकंपों तथा सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं की अनुभूति की जा सकती है। People of Quebec प्रदर्शनी में नगर तथा समाज के विकास में योगदान करने वाले महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों से मुलाक़ात होती है। मानव निर्मित विभिन्न प्रकार की पोशाकें,ध्वज, सिक्के धार्मिक वस्तुएँ तथा अस्त्र-शस्त्र संग्रहीत हैं।

म्यूज़ियम ऑफ फ्रेंच अमेरिका का गिरजाघर विशिष्ट रूप से चित्ताकर्षक है। म्यूज़ियम ऑफ क्यूबेक स्थापत्यशैली के दृष्टिकोण से अद्वितीय है। यह क्यूबेक का सर्वाधिक विशिष्ट म्यूज़ियम है। इसमें क्यूबेक की कला तथा इतिहास के दस्तावेज़ संरक्षित है।

फ्रांटेनेक होटल-(Chateau Frontenac)

परीदेश जैसा किलेनुमा होटल फ़्रांटेनेक होटल क्यूबेक की पहचान है। यह पुरातन क्यूबेक के ऐतिहासिक डिस्ट्रिक्ट के अपर टाउन में स्थित है। इसका डिजाइन ब्रूस प्राइस ने तैयार किया था और कैनेडियन पैसिफिक रेलवे कम्पनी ने निर्माण किया था। ऊंची पहाड़ी पर स्थित इस होटल का उदघाटन 1893 ई में हुआ था। इसमें 18 मंज़िलें हैं। ग्रांड रेलवे होटल्स द्वारा निर्मित होटलों में से एक है। 1981 ई में इसको कैनेडा की राष्ट्रीय ऐतिहासिक स्थल घोषित कर दिया था। तीन बार होटल का विस्तार किया गया। यहाँ से सेंट लारेंस नदी की मनोरम दृश्यावली दिखाई देती है।

ओल्ड पोर्ट –

पुरातन क्यूबेक का एक अन्य मुग्धकारी आकर्षण है वहाँ की पुरानी बन्दरगाह है। सेंट लारेंस नदी के किनारे के साथ-साथ पैदल अथवा बाइसिकल पर सैर करने से तन-मन में नूतन ऊर्जा का संचरण होने लगता है। सेंट लारेंस नदी में अनेक क्रूज जहाज़ लंगर डाले रहते हैं । किनारे पर स्थित हैं अनेक छोटी-छोटी गलियाँ। क्यूबेक मार्केट की एंटिक स्टोर, आर्ट गैलरियां दर्शनीय हैं, खरीददारी भी की जा सकती है। विश्राम करने व खाने-पीने के लिए अनेक रेस्टौरेंट है। इसकी भव्य, चित्ताकर्षक दृश्यावली में चार चाँद लगा देते हैं यहाँ के पुराने ऐतिहासिक भवन जिन में किसी समय थोक व्यापारी और सौदागर रहते थे।रात हो या दिन बन्दरगाह का अपना अनूठा आकर्षण है।

रयू सेंट जीन-

रयू सेंट जीन क्यूबेक की प्राचीनतम व्यापारिक गली रही है। 19वीं सदी में व्यापारी बड़ी संख्या में यहाँ आकर बस गए थे और अपना कारोबार शुरू कर दिया था। कारोबार में दिन दोगुनी और रात चौगुनी तरक्की हुई। जल्दी ही गली को चौड़ा करना पड़ा। अब यह एक लोकप्रिय आकर्षण का केंद्र है। गाने-बजाने वालों, इधर-उधर दौड़ते भागते कामगरों और विंडों शॉपिंग करते पर्यटकों की भीड़ देखी जा सकती है। कवि और संगीतकार गिलेस विग्नौल्ट ने अपने काव्य में सलाह दी है कि शानदार जीवन जीने के लिए रयू सेंट जीन गली में शॉपिंग करना और लोगों से मिलना-जुलना लाभदायक है।

रयू सेंट जीन ब्रिटिश विजय के उपरांत चारदीवारी से बाहरी क्षेत्र को जोड़ने वाला प्रमुख प्रवेश द्वार था। नोटरे-डैम-द -क्यूबेक चर्च के दूसरी तरफ स्थित मार्केट ग्राहकों और व्यापारियों के आकार्षण का प्रमुख केंद्र थी। चारदीवारी के भीतर की जनसंख्या में भी निरंतर वृद्धि हो रही थी इस लिए व्यापारी, सेल्समैन, दुकानदार, कारीगर और कलाकार सभी रयू सेंट जीन की तरफ खींचे चले आते। अनेक लोगों ने तो अपने घरों से ही काम करना शुरू कर दिया था।

संकरी गली लोगों के लिए चिंता का कारण बनती जा रही थी। 1889 ई म्युनिसिपल पार्षद क्यरील डूकुएट, जो घड़ीसाज़ भी था और 1878 ई में टेलीफोन हैंडसेट का आविष्कार किया था, गली को चौड़ी करने की परियोजना पर काम शुरू कर दिया। दक्षिण में निर्मित घरों को ढहा कर कुछ दूर निर्मित किया गया।

1960-1970 ई में रयू सेंट जीन में नवजागरण हुआ और नगर की नाइट लाइफ में प्रतिसंस्कृति आंदोलन का प्रमुख केंद्र बन गया। आगामी दशकों में गली का नवनिर्माण हुआ और यह संगीतकारों, उत्सवों,तथा गायको का केंद्र बन गयी। समय-समय पर यहाँ पर केवल पैदल यात्री ही चल सकते हैं। चर्च,कैफे, रेस्टौरेंट, ऐतिहासिक भवन सभी कुछ तो दर्शनीय है।

ल-द-पैलेस –

1982-1990 ई के बीच लावा यूनिवर्सिटी के पुरातात्विक विभाग ने इंटेंडेंट’स पैलेस के स्थान पर उत्खनन करने पर पाया कि 1668 से लेकर अब तक इस स्थान पर कभी न कभी एक ब्रिवरी, ईंटेंडेंट पैलेस, शाही भंडार, कारागार, आवासीय भवन , बेकरी, सिटी पार्क अंततः एक अन्य पुरातत्विक स्थल मौजूद थे यहाँ पर 18वीं सदी के पुरातत्विक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक क्षण संरक्षित हैं। 3डी तकनीक के माध्यम से देख सकते हैं टेलोन की ब्रिवरी, इंटंडेंट्स पैलेस,सम्राट के बंदीगृह व भंडार तथा बोसवेल ब्रिवरी। 14वीं सदी से लेकर अब तक के इतिहास को पर्दे पर दिखाया जाता है।

पार्लियामेंट बिल्डिंग-

अपर टाउन में चारदीवारी से ठीक बाहर पार्लियामेंट हिल है। यहाँ पर अनेक सरकारी भवन, प्रसिद्ध ‘प्लेन्स ऑफ अब्राहम तथा भव्य ग्रांड अल्ली स्थित है। पार्लियामेंट हिल पर मुग्धकारी शैली में निर्मित पार्लियामेंट भवन तथा उसके सामने के प्रांगण में है मनमोहक फव्वारा। पार्लियामेंट भवन का निर्माण 1877-1886 ई के बीच हुआ था।विशाल चौकोर प्रांगण में न्निर्मित इस के चार भाग चित्ताकर्षक है। स्थापत्यशैली पैरिस के लुव्रे म्यूज़ियम से प्रभावित है। यह क्यूबेक नगर का फ्रेंच शैली में निर्मित एकमात्र सरकारी संस्थान है। प्राचीनतम ऐतिहासिक स्थल और क्यूबेक सरकार का कार्यालय भी यहीं पर है। यहाँ पर नेशनल असेम्बली चैंबर, विधायकों के बैठने का स्थान, लेजिस्लेटिव काउंसिल रूम, स्पीकर की गैलेरी और प्रसिद्ध रेस्टौरेंट ल-पार्लियामेंटेयर भी दर्शनीय हैं। इसमें क्यूबेक की राजनीति पर प्रभाव डालने वाले पुरुषों एवं महिलाओं का जीवनवृत्त वर्णित है। बिल्डिंग के बाहर उनकी स्मृति में 26 कांस्य प्रतिमाएँ स्थापित हैं।

पार्लियामेंट बिल्डिंग से कई आश्चर्यजनक तथ्य जुड़े हैं।

  • पार्लियामेंट भवन के ऊपर गुंबद पर निर्मित पुरातन क्लाक का समय प्रति सप्ताह 15 सेकेंड पीछे हो जाता है। टाइम कीपर आन्द्रे विगर के अनुसार प्रत्येक सेकेंड अमूल्य है। 55 साल से घड़ीसाज़ का काम कर रहा वह प्रत्येक मंगलवार को घड़ी का टाइम ठीक करता है। पुराने मकैनिकल क्लाक को ठीक करने वाले कुछ व्यक्तियों में से एक है।
  • खूबसूरत बाग- नेशनल असेंबली के खूबसूरत बाग देख कर पर्यटक मंत्र मुग्ध रह जाते हैं। यहाँ पर है सब्जियों का बाग जिसमें तरह-तरह की सब्जियाँ, जड़ी बूटियाँ, खाने वाले फलों के पौधे देसी तरीके से उगाये जाते हैं। छत पर मधुमक्खियों के छत्ते भी लगे हैं। 2017 ई मे 250,000 मधुमक्खियों से तैयार किये गए 175 किलो शहद को ( Boutique de l’ Assembl’ee) में बेचा गया।
  • सार्वजनिक रूप से खुली नेशनल असेंबली लायब्रेरी पढ़ने अथवा अध्ययन करने के लिए सर्वाधिक शांत स्थल है। दीवारें, फर्श, सीढ़ियाँ सात तरह के शानदार संगमरमर से बनी हैं। यह एक आश्चर्यजनक तथ्य है कि स्तंभों के संगमरमर में पचास मिलियन पुराने जीवाश्म और कवच रहित जीव भी हैं। लायब्रेरी में दुर्लभ, अमूल्य पुस्तकें भी रखी हैं। प्राचीनतम पुस्तक 1473 ई की है।
  • पार्लियामेंट की निचली मंज़िल पर स्पीकर’स गैलेरी में 1867 ई के बाद के नेशनल असेंबली के सभी पूर्व स्पीकर्स के चित्र टंगे हैं। इन की विशेषता है कि प्रत्येक स्पीकर ने अपने मनपसंद चित्रकार से चित्र बनवाया है। 1976-1980 तक नेशनल असेंबली के स्पीकर क्लेमेंट रिचर्ड ने अपना चित्र क्यूबेक के प्रख्यात चित्रकार जीन पॉल लेमिक्स से बनवाया था।

धार्मिक पर्यटन-

यूरोप में जो महत्त्व किलों का है क्यूबेक में वही महत्त्व चर्चों का है। स्थापत्यकला के दृष्टिकोण से ये अद्वितीय संरचनाएँ हैं।

बेसिलिका नोटरे-डेम-द-क्यूबेक

नोटरे-डेम-द-क्यूबेक चर्च का कई बार पुनर्निर्माण हुआ लेकिन वह 1647 ई से अभी तक पुरातन क्यूबेक में अपने मूल स्थान पर ही स्थित है तथा उत्तरी अमेरिका के प्राचीनतम चर्चों में से एक है। बाहर से सामान्य दिखने वाले इस चर्च का नव बराक शैली में निर्मित व अलंकृत आंतरिक भाग मंत्रमुग्ध करने वाला है। । नोटरे-डेम स्वर्ण पत्रों से अलंकृत,ऐतिहासिक, धार्मिक चित्रों तथा फ्रेंच औपनिवेशिक काल के अमूल्य कोश से समृद्ध है। 350 वर्ष पुराने इस कैथेड्रल के तहखाने को देख कर पर्यटक आश्चर्यचकित रह जाते हैं। यहाँ पर नए फ्रांस के चार गवर्नरों के अतिरिक्त आर्चबिशप, कार्डिनल इत्यादि की 900 समाधियाँ हैं।

नोटरे-डेम-दे-विक्टोयर्स चर्च-

अनेक बार ऐतिहासिक जीर्णोद्धार, पुनर्निर्माण के बाद भी नोटरे-डेम-विक्टोएर्स चर्च फ्रेंच शासनकाल से आज तक रॉयल पैलेस का प्रामाणिक भवन है। सैम्यूल चमप्लेन द्वारा स्थापित कॉलोनी के प्रथम भवन के खंडहर पर 1688 ई में इस चर्च का निर्माणकार्य शुरू हुआ था। बमबारी, पुनर्निर्माण, ढहा देने की धमकियों, नव निर्माण इस की महानतम विजय है। वास्तव में यह आज भी अपनी मूल स्थापत्यशैली में खड़ा है। क्यूबेक के प्रथम बिशप फ्रांसिस द लावल ने इस चर्च के निर्माण के लिए कड़ा संघर्ष किया। 17वीं सदी में निर्मित यह चर्च आज भी श्रद्धालुओं, नवविवाहितों, तथा पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। आज भी चर्च की उत्कीर्ण आकृतियों में पुरातन छवि ही प्रतिबिम्बित होती है।

कैथेड्रल ऑफ दी होली ट्रिनिटी-

यह ब्रिटिश द्वीप से बाहर बनने वाला क्यूबेक का पहला कैथेड्रल था। इस का निर्माण 1804 में हुआ था। क्यूबेक के धर्मप्रांत की स्थापना 1793 ई में हुई थी तथा इसके पहले बिशप डॉ. जेकब माउंटेन ने सबसे पहले कैथेड्रल निर्माण की योजना बनाई। मिलिट्री अफसरों विलियम रोब और विलियम हाल ने भवन का डिजाइन किया और 1800-1804 के बीच निर्माण कार्य पूर्ण कर दिया। 28 अगस्त, 1804 ई को इसका उदघाटन समारोह आयोजित हुआ। सम्राट जॉर्ज iii ने कैथेड्रल के निर्माण का खर्च वहन किया, फोलिओ बाइबल,चांदी के बर्तन तथा पूजा के लिए विशाल प्रार्थना पुस्तकें प्रदान की। 1830 ई में व्हाइट चैपल द्वारा निर्मित बेल टावर में आठ घंटियाँ टंगी हुई थी क्षति ग्रस्त होने पर उनको लंदन के व्हाइट चैपल में मरम्मत के लिए भेजा गया और अप्रैल,2007 में पुनर्स्थापित कर दिया गया।

नेशनल बैटलफील्ड पार्क-

नगर का यह विशाल पार्क किसी समय ब्रिटिश तथा फ्रांस की सेनाओं के बीच भीषण युद्ध स्थल था। एक सदी पहले विकसित पहले बैटलफील्ड पार्क कैनेडा के प्राकृतिक, ऐतिहासिक पार्कों में से एक है। 103 हेक्टेयर भूमि पर फैला यह पार्क चित्ताकर्षक उद्यानों, लताकुंजों, स्मारकों, फव्वारों, स्कीइंग करने के लिए पगडंडियों तथा नदी की मनमोहक दृश्यावली के कारण स्थानीय तथा पर्यटकों का लोकप्रिय भ्रमण स्थल है।

सेंट लारेंस नदी के ऊपर ऊंचाई पर स्थित होने के कारण इसने क्यूबेक की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाई। बैटल फील्ड पार्क प्लेन्स ऑफ अब्राहम के बीच है। यहीं पर देश के भाग्य का निर्णय करने वाला ब्रिटिश तथा फ्रेंच सेनाओं के मध्य 1759 में भीषण युद्ध हुआ था। अंततः फ्रांस ने कैनेडा का आधिपत्य ब्रिटेन को सौंप दिया था। पार्क के अतीत के चिन्ह संरक्षित कीलेबंदी में कहीं -कहीं दिखाई पड़ते हैं। मोर्टेलो म्यूज़ियम की डिस्कवरी पैनल में प्लेन्स ऑफ अब्राहम के ऐतिहासिक युद्धों के बारे में जानकारी मिलती है। ऐतिहासिक जानकारी के बाद पार्क के दक्षिण में ग्रे टेरेस से नदी की खूबसूरत दृश्यावली देखिये। उत्तर में जाने पर जोन ऑफ आर्क उद्यान के अगणित सुगंधित पौधों से शरीर महकने लगता है। लताकुंजों में सारे विश्व के 28 प्रजातियों के वृक्ष लगे हैं। ग्रीष्म ऋतु में पार्क की लम्बी पगडंडियों पर चलना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।

आर्टिलरी पार्क-

नगर के पश्चिम में सेंट चार्ल्स नदी के दूसी ओर स्थित आर्टिलरी पार्क 17वीं शताब्दी से सामरिक दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण स्थल है। फ्रेंच औपनिवेशिक काल से 1940 ई तक नगर का इतिहास चार सर्वथा भिन्न भवनों में संरक्षित है। इस स्थल पर निर्मित चार भवनो में से पहाड़ी की एक तरफ झुका हुआ विशाल सफ़ेद दीवारों के सहारे टिका डौफिन रिडौब्त भवन सर्वाधिक आकर्षक है।

इसका निर्माण 1712 ई में आरंभ हो कर 1748 ई में पूरा हुआ था। ब्रिटिश विजय से पहले तथा बाद में यहाँ पर सैनिक छावनी थी। अंत में यह सुपरिन्टेंडेंट का निवास स्थल बन गया। ग्रीष्म ऋतु में यहाँ पर कलाकार तत्कालीन फ्रेंच व ब्रिटिश सैन्य जीवन का सजीव प्रदर्शन करते हैं। कमरों की तत्कालीन विकास प्रक्रिया को भी दर्शाया है। यहाँ पर सामरिक योजना के लिए मिलिट्री इंजीनियर जीन बाप्तिस्ते दुबर्गर द्वारा किया गया 1795-1810 का क्यूबेक नगर का एक चित्ताकर्षक मॉडल भी रखा हुआ है। यह ब्रिटिश विजय के उपरांत नगर योजना की जानकारी का अद्वितीय स्रोत है। पार्क में भ्रमण करना अपने आप में एक सुखद अनुभूति है जबकि म्यूज़ियम ज्ञानवर्धन का अनुपम स्रोत है।

किला-

पिछली दो सदियों से किला केप डायमंड के नीचे अवस्थित है। ब्रिटिश सेना ने इसका निर्माण शत्रु सेना के आक्रमण को रोकने के लिए किया था लेकिन कभी आक्रमण होने की नौबत ही नहीं आई। किला 17वीं सदी की फ्रेंच किलेबंदी का विशिष्ट उदाहरण है। इसको ‘अमेरिका का जिब्राल्टर ‘ भी कहा जाता है। वर्तमान में किला सक्रिय मिलिट्री बेस तथा रॉयल 22 रेजीमेंट की छावनी है। कैनेडियन आर्मी में यह एकमात्र फ्रेंच भाषी रेजीमेंट है।

उत्तरी अमेरिका में यह किला अपनी तरह का विशालतम है। सितारे के आकार में निर्मित पत्थरों की दीवार वाले किले में चार गढ़ हैं। घेराबंदी होने की अवस्था में आवश्यक सामग्री पंहुचाने के लिए कुछ भवन निर्मित किए गए। 1840 ई में एक हॉस्पिटल भी बनाया गया। दो भवनो का निर्माण फ्रेंच शासनकाल में हुआ: 1693 ई में केप ऑफ डायमंड-रिडौब्त और 1750 ई में गोला बारूद का भंडार (Powder Magazine) निर्मित किए गए।

1871 ई में अमेरिका के शांति समझौता होने पर ब्रिटिश सेना ने नगर छोड़ दिया। कैनेडियन सेना के आर्टिलरी विभाग किले में रहने लगा। कैनेडा के गवर्नर जनरल लॉर्ड डफरिन ने इसको अपना आधिकारिक निवास ब्बना लिया। आज बी यह ओटावा के बाद गवर्नर जनरल का यह दूसरा आधिकारिक निवास स्थल है।

रॉयल 22 रेजीमेंट इस अद्वितीय सैन्य धरोहर की संरक्षक है। इसकी सशस्त्र सेना की टुकड़ी आज भी पुरातन परम्पराओं का पालन करती है। गर्मियों में दर्शकों के सामने पूरी मिलिट्री पोशाक-लाल रंग के कपड़े और सिर पर भालू की खाल की कैप में -(Changing of guards) का सजीव प्रदर्शन करते हैं। किले के म्यूज़ियम में अस्त्र-शस्त्र, यूनिफॉर्म्स तथा नगर के 300साल पुराने सैन्य इतिहास की साक्षी वस्तुएँ संग्रहीत हैं।

स्मारक पुस्तिका में 1914 ई के बाद रॉयल 22 रेजीमेंट के शहीद हुए सैनिकों के नाम अंकित है। प्रतिदिन मिलिट्री का एक सदस्य आ कर पृष्ठ पर लिखे नामों को ज़ोर से पढ़ता है। किला अपने आप में अति विशिष्ट धरोहर एवं दर्शनीय स्थल है।

हूरॉन वेंडेट म्यूज़ियम-

सेंट चार्ल्स नदी के किनारे क्यूबेक नगर के केंद्र में वेंडके संरक्षित स्थान पर स्थित है हूरोन वेंडेट म्यूज़ियम। म्यूज़ियम का प्रमुख आकर्षण है हूरोन वेंडेट राष्ट्र के इतिहास और सभ्यता का सजीव चित्रण। 2008 में स्थापित यह म्यूज़ियम वेंडेट राष्ट्र का राष्ट्रीय संस्थान माना जाता है। यहाँ समुदाय की पारंपरिक प्रथाओं को देखा जा सकता है। भवन के भीतर प्रवेश करने से पहले ही इसका शंकु आकार भारतीय स्मोक हाउस की याद दिला देता है। इसकी संरचना शांति और सहनशक्ति की प्रतीक छोटी और घेरेदार है।

यहाँ पर तीन स्थायी प्रदर्शनियाँ हैं- राज्य क्षेत्रीय, संस्मरण तथा ज्ञान। इस अंतरसंबंधी प्रदर्शनी में पुरातन , दुर्लभ वस्तुओं तथा वेंडेके सभ्यता से प्रत्यक्ष साक्षात्कार किया जा सकता है। दुर्लभ वस्तुओं-पोशाक,फर्नीचर,टेक्सटाइल, आभूषण तथा अन्य वस्तुओं को संग्रहीत करने में चालीस वर्ष लग गए।

म्यूज़ियम की निचली मंज़िल पर दर्शक न केवल हूरोन वेंडेट की प्राचीन सभ्यता संस्कृति के बारे में जान पाते हैं अपितु पहले राष्ट्र के लोगों की जीवनशैली से भी परिचित होते हैं। विविध रूपों में संग्रहीत वस्तुएँ कलात्मक एवं मानवविज्ञान की द्योतक हैं।

ल-द-ओर्लीन्स –

1700 ई के ग्रामीण जीवन का सशक्त साक्षी है- ल-द-ओर्लीन्स। क्यूबेक नगर से कार अथवा अन्य वाहन से पंहुचने में पंद्रह मिनट लगते हैं जबकि बाइसिकल से एक घंटे में पंहुचा जा सकता है। द्वीप पर पंहुचने के लिए पुल पार करना पड़ता है। यह प्रांत का सबसे पुराना रिहायशी इलाका है। वर्तमान में यह केवल 34 कि मी में सिकुड़ कर रह गया है। यहाँ पर 600 ऐतिहासिक महत्त्वपूर्ण इमारतें हैं। द्वीप में स्थित फार्म क्यूबेक नगर की रसोइयों को सेब,बेरीस, वाइन, मैपल का शर्बत व अन्य उत्पाद सप्लाई करते हैं। द्वीप में देखने के लिए शिल्पकला की वस्तुएँ, गेलेरियाहैं। खाने के सामान की दुकानों पर बैठ कर विश्राम के साथ-साथ ताज़ा फलों और पेय पदार्थों का स्वाद चखा जा सकता है । सेंट लारेंस नदी की मनमोहक दृश्यावली पर्यटको को मंत्रमुग्ध कर देती है।

विंटर कार्निवल –

1955 ई से क्यूबेक का विंटर कार्निवल सम्पूर्ण विश्व के अगणित पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है। यह विश्व का सर्वाधिक विशाल विंटर कार्निवल है। अपनी पारिवारिक, सौहार्दपूर्ण परम्पराओं को सँजोए रखने के कारण यह आज भी क्यूबेक के बर्फीले, ठंडे मौसम में अगणित लोगों के मनोरंजन का ईकेंद्र है। कार्निवल का शुभांकर ‘बोहोमे’ है। इसको मनोरंजन की आत्मा का प्रतीक माना जाता है। कार्निवल के प्रमुख आकर्षण हैं-शुभांकर ‘बोहोमे’ के लिए बर्फ का राजप्रासाद बनाया जाता है। राजप्रासाद के निर्माण में सभी नागरिक बढ़-चढ़ कर भाग लेते हैं। कार्निवल की प्रमुख गतिविधियों का वही केंद्र होता है।

बर्फ से ढकी गलियों में बहुरंगी कार्यक्रमों को देखने के लिए दर्शकों की अपार भीड़ जमा हो जाती है।

आईस केनोए रेस-यह अत्यधिक प्रतिस्पर्धात्म्क खेल है। इसमें सेंट लारेंस नदी के बर्फीले पानी में टीमों को केनोइंग करनी होती है।

विशेष –

अपने आप में रोचक इतिहास समेटे पुरातन क्यूबेक निस्संदेह एक चित्ताकर्षक पर्यटन स्थल है। पूरे विश्व के साथ हवाई मार्ग से सम्बद्ध है। समीपस्थ एयरपोर्ट क्यूबेक से 16 कि.मी दूर जीन लेसेज एयरपोर्ट है। मांट्रियल तथा पुरातन क्यूबेक में प्रतिदिन रेलसेवा उपलब्ध है। पुरातन क्यूबेक की यात्रा किसी भी समय की जा सकती है। किसी भी समय जाने पर वहाँ मनोरंजन के साधन तथा उत्सव पर्यटको को आमंत्रण देने के लिए तैयार रहते हैं। सर्दियों में विंटर कार्निवल स्वागत करने के लिए तैयार रहता है तो गर्मियों में समर फेस्टिवल। आवास-तथा खान-पान भी बजट के अनुरूप सुविधा जनक हैं।

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प्रमीला गुप्ता