श्रीलंका स्थित शानदार गाल किला

श्रीलंका के दक्षिणी-पश्चिमी तट पर ‘गाल किला’ अथवा ‘डच किला’ विश्व पर्यटकों के विशिष्ट आकर्षण का केंद्र है। इस किले का निर्माण पहले पुर्तगालियों ने करवाया था। 16वीं सदी में निर्मित यह किला एक सामान्य किला था। 17वीं सदी में डच आधिपत्य के बाद इसमें व्यापक संरचनात्मक परिवर्तन करवाए गए। 16 वीं सदी से 19वीं सदी तक दक्षिणी-पूर्वी एशिया के पुरातात्त्विक स्थापत्य तथा ऐतिहासिक स्मारकों पर डच प्रभाव विशिष्ट रूप से परिलक्षित होता है। यूनेस्को द्वारा ज़ारी की गयी विज्ञप्ति में कहा गया है कि इन नगरीय संरचनाओं के समूह में 16वीं तथा 19वीं सदी की दक्षिण एशियायी तथा यूरोपीय स्थापत्यशैली का अद्वितीय सम्मिश्रण है। इसी कारण से 1988 ई में इसको विश्वविरासत के रूप में मान्यता प्रदान की गयी थी।

इतिहास-

1505 ई में इस बन्दरगाह पर लौरेंको-द-अल्मेडा के नेतृत्व में पुर्तगालियों ने अपना कदम रखा था। तत्कालीन सम्राट धर्मपराक्रमा बाहु (1484-1514) के साथ मैत्री संबंध स्थापित कर प्रायद्वीप में उल्लेखनीय विकास किया। पुर्तगालियों से पहले इब्न बतूता भी इस बन्दरगाह पर आ चुका था। पुर्तगालियों द्वारा निर्मित इस किले का इतिहास उसी समय से आरंभ होता है। 1541 ई में निर्मित किले का इतिहास उसी समय से आरंभ होता है। 1541 ई में किले के भीतर एक गिरजाघर भी बनवाया गया था। पुर्तगालियों ने विद्रोही सिंहली लोगों के लिए एक बंदी शिविर भी स्थापित किया था। 1588 ई में पुर्तगालियों ने ताड़ के पत्तों और मिट्टी से एक छोटे से किले का निर्माण किया था। बाद में बन्दरगाह की निगरानी करने के लिए तीन परकोटों व एक निरीक्षण चौकी सहित किला बनवाया।

डच आधिपत्य-

1640 ई में डच लोगों के आने के बाद परिदृश्य पूरी तरह से बदल गया। सम्राट राजसिंह द्वितीय के साथ मिल कर उन्होने गाल किले पर अधिकार कर लिया। 1640 ई में कोस्टर के नेतृत्व में 2,500 सैनिकों ने किले पर अधिकार कर लिया था। सिंहली जनता ने न चाहते हुए भी किले के पुनर्निर्माण में यंत्रवत सहयोग दिया। वर्तमान किला डच स्थापत्यशैली में निर्मित है। किले का निर्माण कार्य अठारहवीं सदी के आरंभ तक चलता रहा। किले की दीवारें मूँगे तथा ग्रेनाइट से निर्मित हैं।

किले की लम्बाई,चौड़ाई व ऊंचाई पर्यावरण के आधार पर निर्धारित की गयी। चौड़ी सड़कों पर घास तथा रास्तों पर छाया की व्यवस्था की गयी। घरों का निर्माण किनारों पर किया गया। हर घर में बाग व खुले दालान की व्यवस्था थी। कहीं-कहीं चूना-पत्थर, बालू आदि भी इस्तेमाल किया गया। किले के भीतर सैन्य कमांडर का आवास, शस्त्रागार, आयुधागार था। समुद्री सुरक्षा को ध्यान में रख कर लकड़ी व रस्सी बनाने का कारख़ाना, सुरक्षागृह तथा बैरकों का निर्माण किया गया। किले के परिसर में अनेक ऐतिहासिक चर्च, मस्जिदें, व्यावसायिक एवं प्रशासनिक कार्यालय भी स्थित हैं । शाम के समय किले की दीवार के साथ-साथ भ्रमण करने पर सुखद अनुभूति होती है।

डचवासियों ने दक्षिण एशियाई स्थापत्य शैली के साथ यूरोपीय वास्तुकला का मिश्रण कर एक अद्वितीय संरचना का निर्माण किया। 52 हेक्टेयर भूमि पर ने किले में 14 गढ़ों का निर्माण करवाया । गढ़ों के नाम नक्षत्र,चंद्र,सूर्य,उषा देवी, ट्रेमोन ,क्लेपंबर्ग व एमलून रखे गए। आंतरिक संरचना में परिवर्तन तथा चारों तरफ परकोटे बन जाने के बाद डच अपने सामुद्रिक प्रतिद्वंदियों का सामना करने में पूरी तरह सक्षम हो गए थे। 52 हेक्टेयर भूमि पर फैला यह किला आज भी उसी रूप में संरक्षित है। किले के उत्तर में झूलेदार पुल तथा खाई है। किले की दीवारें 10,400 फीट लंबी है।

प्रवेश द्वार-

किले के दो प्रवेश द्वार हैं। ये दोनों ऊंचे गेट के ऊपर से नीचे की तरफ खुलते हैं। किले के उत्तर में स्थित मुख्य प्रवेशद्वार भारी सुरक्षात्मक संरचना है। पुर्तगालियों द्वारा निर्मित खाई को डच लोगों ने पुराने किले की दीवार तक अधिक चौड़ा कर दिया था। 1669ई में डच लोगों द्वारा निर्मित पुल से खाई पार की जा सकती है। आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रवेशद्वारों का नवनिर्माण व विस्तार होता रहा। प्रमुख द्वार पर डच तथा ब्रिटिश अभिलेख दिखाई देते हैं। प्रवेश द्वार पर 1668 ई में अंकित अक्षर”VOC”है । इसका अर्थ है ‘डच ईस्ट इंडिया कम्पनी’। इस पर दो सिंहों के मध्य मुर्गे का चित्र अंकित है। किले की दीवार पर आगे जाना पर आता है ‘काला बुर्ज’। किले का पूर्वी भाग यूट्रेच्तपॉइंट पर खत्म हो जाता है।

गाल सागर तट पर स्थित लाइट हाउस पर्यटकों के विशिष्ट आकर्षण का केंद्र है। गाल तट पर स्थित लाइटहाउस सागर की नीली लहरों के साथ मुग्धकारी दृश्य प्रस्तुत करता है। यही नहीं गाल किले के परिसर में स्थित होने के कारण इसका सौंदर्य द्विगुणित हो जाता है।

वर्तमान लाइट हाउस का निर्माण 1939 ई में पुराने लाइट हाउस के स्थान पर किया गया था। पुराना लाइट हाउस 1934 ई में जल कर राख़ हो गया था। यह स्वचालित लाइट हाउस आज भी काम कर रहा है। पहले लाइट हाउस की तुलना में इसकी ऊंचाई दो फीट ज़्यादा अर्थात 26.5 मीटर है। पर्यटक यहाँ पर इसके सौन्दर्य को निहारने आते हैं,साथ ही साथ समीप के तटों पर लेट कर विश्राम करते हैं।

किले की दीवार पर अगला पड़ाव ‘फ्लैग रॉक बुर्ज’ है। बन्दरगाह में प्रवेश करने वाले जहाज़ों को खाड़ी में स्थित विनाशकारी चट्टानों से सावधान रहने की चेतावनी दी जाती थी। आगे है ‘ट्रिओन बुर्ज’। यहाँ पर एक पनचक्की है। यह सागर से पानी खींच कर शहर की धूल भरी सड़कों को गीला करती है। यहाँ से सूर्यास्त का मुग्धकारी दृश्य दिखाई देता है।

वास्तव में किला एक छोटे से सुनियोजित शहर का प्रतिरूप है। आयताकार सड़कें तथा डच शैली में बने कम ऊंचे घर हैं। किले के अंदर होटल भी हैं । 1694 ई में निर्मित ओरियंटल होटल मूलतः डच गवर्नर तथा उसके कर्मचारियों के लिए था। 1865 ई में न्यू ओरियंटल होटल में परिवर्तित कर दिया गया था। 19वीं सदी तक इसमें यूरोप एवं गाल बन्दरगाह पर आने वाले यूरोपीय यात्री ठहरते थे। 2005 ई में इसका आधुनिकीकरण कर ‘अमंगला रिज़ार्ट्स’ नाम दिया गया है।

वर्ष 1796 में किले पर ब्रिटिश साम्राज्य का आधिपत्य हो गया। यह उनका दक्षिणी मुख्यालय रहा। उन्होने किले में अनेक बदलाव किए यथा खाई को पाट दिया,यूट्रेच्त बुर्ज पर लाइट हाउस की स्थापना की, चंद्र बुर्ज और सूर्य बुर्ज के मध्य गेट का निर्माण किया। 1883 ई में साम्राज्ञी विक्टोरिया के सम्मान में एक मीनार भी बनवाई गयी। किले की सुरक्षा के विचार से द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अनेक संरचनाओं का निर्माण हुआ। अपने निर्माण काल से लेकर अब तक (16-19) गाल किला दक्षिण-पूर्वी एशिया में यूरोपीयन्स द्वारा निर्मित दक्षिण एशिया की तथा यूरोपीय शैली के समन्वय से निर्मित किलेबंद नगर का अद्वितीय उदाहरण है।

विशिष्ट आकर्षण-

गाल क्लाक टावर-

गाल क्लाक टावर गाल किले में स्थित पर्यटकों के विशिष्ट आकर्षण का केंद्र है। यह पूर्व में गार्ड रूम के केंद्र में चंद्र गढ़ से दिखाई देता है। क्लाक टावर के निर्माण के लिए लोगों से सार्वजनिक रूप से धन संग्रहीत किया गया था। इसका निर्माण 1883 ई में डॉ.पी. डी. एंथोनिस्ज़ की स्मृति में किया गया था। डॉ. एंथोनिस्ज़ प्रसिद्ध बर्घर डॉ.थे। उन्होने लेजिस्लेटिव काउंसिल तथा दक्षिणी प्रांत में सर्जन के रूप में उल्लेखनीय काम किया था। एक कृतज्ञ रोगी मुदलियार सेमसन द एब्र्यु राजपक्षे ने आभार स्वरूप इसका निर्माण करवाया था। टावर की ऊंचाई लगभग 83 फीट है और यह किले के भीतर घुसते ही दिखाई देता है। क्लाक का घंटा प्रत्येक घंटे के बाद बजता है।

डच रिफॉर्मड चर्च-

वर्ष 1640 में डच चर्च का निर्माण हुआ था। 1752-1755 ई के मध्य इसको नवनिर्मित किया गाय। 1640 ई में पुर्तगालियों पर विजय प्राप्त करने के बाद सर्वप्रथम निर्मित होने वाले भवनों में से एक यह था। इस भव्य सफ़ेद संरचना के निर्माण में लगभग पचास वर्ष लग गए। यह किले में सर्वोच्च स्थान पर स्थित है तथा श्रीलंका के प्राचीनतम चर्चों में से एक है। चर्च के भीतर प्रार्थना सभाएं आयोजित होती हैं। भीतर कब्रिस्तान व कब्र के पत्थर भी हैं।

श्री सुधरमलाया बौद्ध मंदिर-

गाल किले में स्थित है बौद्ध मंदिर ‘सुधरमलाया मंदिर’। यह किले के केंद्र की प्रमुख पश्चिमी गली ‘रंपार्ट गली’ के सामने क्लिपेनबर्ग गढ़ में है। गढ़ के सामने निर्मित सफ़ेद मंदिर के बाहर भगवान बुद्ध की प्रतिमा निर्मित है। मंदिर के भीतर प्रार्थना सभागार, 1889 ई में निर्मित एक छोटा स्तूप, भगवान बुद्ध की लेटी हुई विशाल प्रतिमा के अतिरिक्त अन्य कई छोटी-छोटी प्रतिमाएँ है। मंदिर के प्रार्थना सभागार के ऊपर एक छोटा घंटाघर है जो इस बात का द्योतक है कि किसी समय यहाँ पर चर्च रहा होगा। वर्तमान में मंदिर के नियमित क्रियाकलापों के अतिरिक्त सभागार में योगा भी सिखाया जाता है।

गाल किले में सर्वधर्म समनव्य की भावना देखी जा सकती है। प्रत्येक धर्म और समुदाय के लोग आपस में स्नेहपूर्वक, बिना किसी भेदभाव के रहते हैं। यू.एन के पूर्व सेक्रेटरी जनरल बन की-मून ने 2016 की अपनी गाल किले की यात्रा के समय कहा था कि उन्हे विभिन्न धर्मों,समुदायों के मध्य शांतिपूर्ण व सौहार्दपूर्ण व्यवहार को देख कर अतीव प्रसन्नता हुई। इस का प्रमाण गैलेरी का यह चित्र है

राष्ट्रीय सामुद्रिक (Maritime) संग्रहालय

वर्ष 1992 में 9 मई को श्रीलंका सरकार ने राष्ट्रीय सामुद्रिक संग्रहालय स्थापित करने का निर्णय लिया। पुरानी संरचनाओं को नया रंग रूप प्रदान कर उसमें प्रमुख रूप से सामुद्रिक जीवन से जुड़ी वस्तुओं को संग्रहीत किया। संग्रहालय का भंडारगृह दो मंज़िली लम्बी इमारत में है। किले का मुख्य प्रवेशद्वार ग्राउंड फ्लोर को अलग करता है। म्यूज़ियम में दो गैलेरियां विशिष्ट रूप से दर्शनीय हैं। पहली के भीतर दक्षिणी श्रीलंका में प्रयुक्त होने वाले विविध प्रकार के जलयान तथा स्थानीय मछुआरों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला सामान रखा है। दूसरी गैलेरी प्रमुख रूप से सामुद्रिक जैव विविधता पर केन्द्रित है। राष्ट्रीय नौवहन संग्राहलय तक पैदल अथवा किसी वाहन से पंहुचा जा सकता है। ऊपरी मंज़िल पर जाने का मार्ग वर्तमान मेन गेट से है जबकि निचली मंज़िल प्रमुख प्रवेश द्वार के साथ है।

गलियाँ-

किले के भीतर आयताकार गलियाँ हैं। इनके नाम डच कालीन हैं। श्रीलंका में व्यापार के लिए आए अरब-मुस्लिम मूर्स व्यापारियों के नाम पर ‘मूर्स फेरी वाला’ गली है। प्रकाश स्तम्भ वाली गली का नाम ‘प्रकाश स्तम्भ वाली गली’ है। 1936 के भीषण अग्निकांड में यह प्रकाश स्तम्भ नष्ट हो गया था। दक्षिण भारतीय पारावा प्रवासियों के लिए ‘पारावा गली’ है। ये लोग मूलतः मछुआरे तथा व्यापारी हैं। नारियल बागानों के डच मालिकों के नाम पर तथा नारियल व अन्य फलों से पेय पदार्थ बनाने वाले व्यापारियों के नाम पर भी गलियाँ हैं। अब किला प्रवासी कलाकारों, लेखकों, फोटोग्राफरों तथा कवियों का अड्डा है। उनके लिए यहाँ पर सुविधाजनक बुटीक, होटल व रेस्टौरेंट हैं।

ब्रेडफ्रूट ट्री-

डच लोगों ने गाल में पहली बार ब्रेड फ्रूट ट्री (कटहल ) का पेड़ लगाया था। श्रीलंका का सबसे पुराना ब्रेड फ्रूट का पेड़ गाल किले में अक्स्लुर्ट बुर्ज पर है। किंवदंती के अनुसार डच लोगों ने गर्म तासीर के इस पेड़ को यहाँ पर लगाया था कि यह या तो यहाँ के निवासियों को मार देगा या फिर बीमार कर देगा। लेकिन श्रीलंका वासियों ने इसका उपचार ढूंढ निकाला। उन्होने नारियल में ब्रेडफ्रूट को मिला कर एक स्वादिष्ट व्यंजन तैयार कर लिया जो आज भी बहुत लोकप्रिय है। अब तो यह वृक्ष पूरे श्रीलंका में उगाया जाता है।

किले से सूर्यास्त का मुग्धकारी दृश्य-

शाम के समय किले से सूर्यास्त का मुग्धकारी दृश्य देख कर पर्यटक चित्रलिखित रह जाते हैं । सागरतट पर सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए पर्यटक विशेष रूप से आतुर रहते हैं। हररोज शाम के समय स्थानीय लोग व पर्यटक किले के साथ-साथ सागर तट पर एकत्रित हो कर इस मनोरम दृश्य को देखकर प्रफुल्लित हो उठते हैं। आनंद से परिपूर्ण वातावरण में बच्चे खेल खेलते हैं, आसमान में पतंगें उड़ाते हैं और पर्यटक सब कुछ भुला कर देश-दुनिया की बातें करते हैं।

पेडलर गली-

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गाल किले का भ्रमण करने के उपरांत सभी पर्यटक अपने साथ स्मृति चिन्ह, हस्तशिल्प से निर्मित सुंदर शिल्पाकृतियाँ, स्वास्थ्य तथा सौंदर्य में वृद्धि करने वाले आयुर्वेद पर आधारित प्राकृतिक उपादान खरीदना चाहते हैं। इन सब के लिए गाल किले की ‘पेडलर स्ट्रीट’ सर्वोत्तम स्थान है। गली में आकर्षक स्टोर,कला दीर्घाएँ, हस्तशिल्प स्टोर,स्पा,बुटीक व रत्नों की दुकानें हैं। कला तथा शिल्प के प्रशंसकों के लिए ‘पेडलर स्ट्रीट’ में घूमना एक अविस्मरणीय अनुभूति होगी। गाल किले में मोल-भाव करना उचित नहीं। यहाँ पर सभी सामान उचित मूल्य पर मिलता है। कुछ प्रमुख दुकानें हैं-बेयरफुट ,आरकिड हाउस।

नव निर्माण-

लगभग 450 वर्ष पुराने इस किले की दीवारें स्वाभाविक रूप से कमजोर होने लगी हैं। मौसम,समुद्री लहरों के प्रभाव से पेड़-पौधों के कारण व प्रबंधन की कमियों के कारण किले की स्थिति चिंताजनक है। सुनामी के कारण भी इसकी दीवारों को काफी नुकसान पंहुचा। 2007 से 2008 तक डच इंजीनियरों ने इसकी मरम्मत का काम किया। मुख्य उद्देश्य इस विश्व धरोहर के ऐतिहासिक चरित्र को यथासंभव संरक्षित रखना है। धन की समस्या को दूर करने के लिए प्रबन्धकों ने किले के कुछ भाग को लीज़ पर देने का फैसला किया है। प्राप्त आय किले के संरक्षण तथा प्रबंधन पर खर्च की जाएगी। किले के इतिहास तथा औपनिवेशिक विरासत का संरक्षण कर पर्यटकों के लिए इस दर्शनीय स्थल को सुरक्षित रखना निश्चितरूप से एक बड़ी चुनौती है।

किला प्राचीन सैन्यशक्ति, स्थापत्यकला एवं व्यापारिक गतिविधियों को जानने का उत्कृष्ट माध्यम है। यूरोप तथा एशियायी परम्पराओं का अपूर्व संगमस्थल होने के कारण सम्पूर्ण विश्व के पर्यटकों के विशिष्ट आकर्षण का केंद्र है। पर्यटन के कारण स्थानीय अर्थव्यवस्था में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका है।

विशेष-

श्रीलंका की राजधानी कोलम्बो का अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा पूरे विश्व के साथ जुड़ा है। यहाँ से गाल किले तक बस अथवा ट्रेन द्वारा सुविधापूर्वक पंहुचा जा सकता है। गाल किले में बजट के अनुरूप आवास, खाने-पीने की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

गाल जाने के लिए अक्तूबर-अप्रैल तथा फरवरी-अप्रैल के बीच का समय सर्वोत्तम है। इस समय में हल्की बारिश तथा सुहावना मौसम रहता है। इस समय यहाँ पर भारी भीड़ रहती है। हालांकि गाल किले की यात्रा कभी भी की जा सकती है।

निश्चित रूप से जीवन में एक बार तो किले के भ्रमण की सुखद अनुभूति अविस्मरणीय होगी।

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प्रमीला गुप्ता

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