भव्य पुरातन हवाना –

क्यूबा की राजधानी हवाना का डाउनटाउन है पुरातन हवाना। यह हवाना के पंद्रह नगर निगमों में से एक है।


मेक्सिको की खाड़ी के मुहाने तथा अमेरिका के फ्लॉरिडा राज्य की धुरी पर स्थित क्यूबा की राजधानी हवाना का डाउनटाउन (पुरातन हवाना) हवाना के पंद्रह नगर निगमों में से एक है। यहाँ पर धड़कता है हवाना का दिल। घनी आबादी, सुव्यवस्थित चारदीवारी से घिरा पुरातन हवाना विश्व के पर्यटकों के लिए विशिष्ट आकर्षण का केंद्र है। इसकी अद्वितीय, सुव्यवस्थित किलेबंदी।स्थापत्यकला को दृष्टिगत रखते हुए 1982 ई में यूनेस्को की विश्व विरासत समिति ने पुरातन हवाना को विश्वविरासत घोषित कर दिया था।

स्पेन शासकों ने हवाना खाड़ी की प्राकृतिक बन्दरगाह पर 1529 में इस नगर की स्थापना की थी। यह नयी दुनिया तथा पुरानी दुनिया के बीच बहुमूल्य खजाने से भरे स्पेनिश जहाजों के लिए पड़ाव का काम करता था। 17वीं शताब्दी में यह जहाज़ निर्माण का प्रमुख केंद्र बन गया था। नगर का निर्माण तत्कालीन ‘बराक शैली’ एवं ‘नियोक्लासिक स्थापत्य शैली में किया गया था। 20वीं सदी के उत्तरार्ध में अनेक इमारतें ध्वस्त हो गयी थीं। कुछ इमारतों का पुनर्निर्माण किया गया। पुरातन हवाना की संकरी गलियों में आज भी अनेक मूल इमारतें संरक्षित हैं। बन्दरगाह के तट पर स्थित पुरातन हवाना में प्रशासकीय कार्यालय तथा प्लाज़ा-द- अर्मस है। फ्रांसीसी समुद्री लुटेरे जैक्स-द-सोरेस ने 1555 ई में पूरे नगर को आगजनी और लूटपाट से तहस-नहस कर ड़ाला। गिने-चुने लोग ही बचे थे। सोरेस ने जिस धन-दौलत के लालच में लूटपाट मचाई थी वह उसको नहीं मिली। उसको खाली हाथ ही लौटना पड़ा।

इस घटना के बाद स्पेन के सम्राट ने नगर की सुरक्षा को ध्यान में रख कर नगर के चारों तरफ सुदृढ़ किलेबंदी करवा दी थी। ‘केस्टिलो-द-ला-रीयल फ्यूएजन’ पहला किला था। इसका निर्माण कार्य इंजीनियर बार्टोलोम सेंचेज़ की देखरेख में 1558 ई में सम्पन्न हुआ था। अलेंजों कार्पेंटियर इसको स्तंभों पर स्थित किला कहते थे। यहाँ का प्रवेशद्वार, खंडित इमारतें, शीतल,छायादार बरामदे चित्ताकर्षक हैं। पुरातन स्मारक, किले, कानवेंट,चर्च, राजप्रासाद, संकरी गालियां, लोगों की गहमागहमी पर्यटकों का मन मोह लेती हैं। क्यूबा का प्रशासन पुरातन हवाना के संरक्षण के लिए प्रत्येक संभव प्रयास कर रहा है।

पुरातन हवाना के मनोरम स्थलों का आनंद पैदल चल कर लिया जा सकता है। संकरी गलियों में घूमते फिरते,स्थानीय लोगों से बातचीत करते-करते कब स्पेनिश किला आ जाता है पता ही नहीं चलता। नवीन बराक शैली में निर्मित कैफ़े में मधुर संगीत के बीच काफी की चुसकियाँ तन-मन को नूतन ऊर्जा से परिपूर्ण कर देती हैं।

कैथेड्रल-सन- क्रिस्टोबल –

यह चर्च क्रिस्टोबल नाम के अनुरूप ही भव्य तथा पर्यटकों के विशिष्ट आकर्षण का केंद्र है। यह ‘पवित्र वर्जिन मेरी कैथेड्रल’ के नाम से भी प्रसिद्ध है। क्यूबा की अद्वितीय बराक शैली में निर्मित इस प्लाज़ा का निर्माणकार्य 29 वर्ष में 1777 ई में पूरा हुआ था। बाहर दो विशाल घंटाघर हैं। भीतर खूबसूरत स्तम्भ, मेहराबदार छतें तथा सेंट क्रिस्टोफर की सुंदर प्रतिमा है। कहा जाता है कि यहाँ पर 1796 ई से 1898 ई तक क्रिस्टोफर के स्मृतिचिन्ह रखे हुए थे। कैथेड्रल को भीतर से देखने के बाद पर्यटक बाहर किसी कैफे में बैठ कर उसके भव्य, सुसज्जित बाह्य सौंदर्य का आनंद लेते हैं।

प्लाज़ा-द-अर्मस-

लगभग पाँच सदियों से ‘प्लाज़ा-द-अर्मस’ नगर की प्रमुख गतिविधियों का केंद्र है। इसमें अनेक कैफ़े,रेस्टौरेंट, छायादार बाग हैं। गर्मी से राहत पाने के लिए पर्यटक यहाँ पर विश्राम करते हैं। प्लाज़ा के साथ अनेक खूबसूरत इमारतें हैं। विशिष्ट है- ‘पैलेसियो-द-लो-कैपिटन्स’। यहाँ पर 60 से अधिक जनरल आए थे। अब यहाँ पर ‘म्यूजियो-द-ला-सिउडाड'( सिटी म्यूज़ियम) स्थित है। इसके हरे-भरे प्रांगण में संगीत कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। प्लाज़ा-द-अर्मस के केंद्र में स्थित है 16वीं सदी में निर्मित औपनिवेशकालीन किला ‘केस्टिलो-द-ला-फ्यूएरजा’। फवारे के समीप स्थित है क्यूबा के राष्ट्र नायक ‘केस्पेडेस’ की प्रतिमा।

ला-बोडेगिरा-डेल-मेडियो-

यहाँ पर प्रख्यात लेखकों के पदचिन्ह अंकित हैं। इस रेस्टौरेंट की स्थापना 1942 ई में हुई थी। यह प्रख्यात लेखकों का प्रिय स्थान था। पाब्लो नेरुदा, गेब्रियल गर्सिया मार्क्वेज, नाट किंग काल और अर्नेस्ट हेमिंग्वे का यह प्रिय स्थान था। पर्यटक यहाँ आते हैं, बैठकर शीतल पेय, सी फूड का स्वाद चखते हैं तथा क्यूबा के मधुर संगीत का आनंद लेते हैं। यहाँ के कण-कण में प्रसिद्ध लेखकों व संरक्षकों की छाप अंकित है।

केस्टिलो- द-ला-फ्यूएरजा-

सिटी म्यूज़ियम से थोड़ी दूरी पर स्थित है 16वीं सदी में निर्मित किला-केस्टिलो-द-ला-फ्यूएरिजा। समुद्री डाकुओं के आक्रमण से सुरक्षा को ध्यान में रख कर इस किले का निर्माण करवाया गया था। किस्मत की बात है कि उस उद्देश्य के लिए किले का उपयोग करने की कभी आवश्यकता ही नहीं पड़ी। इसके विपरीत यह सैन्य अधिकारियों, संभ्रांत वायक्तियों के निवासस्थल तथा बहुमूल्य वस्तुओं के भंडारगृह के रूप में इस्तेमाल किया गया। फ्रांसिस्को-द-केलोना ने इसका डिजाइन तैयार किया था और निर्माण करवाया था। इंजीनियरिंग के दृष्टिकोण से यह संरचना अद्वितीय है। किले की दीवारें 6मीटर मोटी तथा 10 मीटर ऊंची हैं। यहाँ के सामुद्रिक संग्रहालय में पुरातन नौकाओं के मॉडल, हथियार तथा डूबे हुए जहाजों से निकाला गया बहुमूल्य सामान रखा हुआ है।

म्यूजियो-द-ला-सिउडाडा (सिटी म्यूज़ियम)

भव्य बराक शैली में निर्मित ‘पैलेसियो-द-ला-कैपिटन्स’ में स्थित सिटी म्यूज़ियम में संरक्षित है हवाना का अतीत। ‘हाल ऑफ हिरोइक में क्रांतिकालीन विशिष्ट सामान रखा हुआ है। कला में रुचि रखने वाले एस्पेडा स्माधिस्थल पर फ्रेंच कलाकार ‘वरमे’ की समाधि को देख कर अभिभूत हो जाते हैं। सिंहासन कक्ष में विशाल शानदार कुर्सी रखी हुई है। इसका निर्माण स्पेनिश सम्राट के बैठने के लिए करवाया गया था। भाग्य से न तो सम्राट आए और न ही कुर्सी इस्तेमाल हुई। केवल संग्राहलय में दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। ‘सेलोन-द-लो-एस्प्रेजोस’ 19 वीं सदी के चित्ताकर्षक दर्पणों से सज्जित है। इसी कक्ष में 1899 ई में स्पेनिश आधिपत्य की समाप्ति की घोषणा की गयी थी। यहाँ के अन्य विशिष्ट आकर्षण हैं-‘पैरोक्वील चर्च का स्मारक’ इसमें क्यूबा की ला-गिरलिडला’ की प्राचीनतम कांस्य प्रतिमा विद्यमान है।

प्लाज़ा विएज़ा-

प्लाज़ा विएजा समय-समय पर भिन्न रंग-रूप लेता रहा है। अब यह जनसामान्य के घूमने-फिरने के लिए प्रिय स्थान है। 16वीं सदी के मध्य स्थापित इस प्लाज़ा में किसी समय युद्धाभ्यास किया जाता था। यहाँ पर खूबसूरत बाज़ार भी था। 1950 ई में यहाँ पर भूतल पार्किंग बना दी गयी। नगरवासियों के विरोध करने पर सरकार के समर्थन से प्लाज़ा का पुनर्निर्माण किया गया। अब यह प्लाज़ा पुरातन हवाना का सर्वाधिक लोकप्रिय स्थान है। क्यूबा की नवीन बराक शैली में निर्मित भवनों की शोभा देखते ही बनती है। प्लाज़ा के मध्य 18वीं सदी का एक छोटा सा सुंदर फव्वारा भी मुग्धकारी है। 18 वीं सदी की एक अन्य संरचना ‘कासा-द-कोंडा-जरुको’ की रंगीन काँच की खिड़कियाँ भी दर्शकों का मन मोह लेती हैं। इस चित्ताकर्षक स्थान की सैर करने के बाद पर्यटक 35 मीटर ऊंचे गुंबद ‘कैमरा ओब्स्क्युरा’ पर खड़े हो कर नगर की मनोरम दृश्यावली देख कर मंत्रमुग्ध रह जाते हैं। एक छोटे से म्यूज़ियम में ताश का इतिहास दर्शाया गया है। देखने के बाद किसी कैफ़े में बैठ कर विश्राम किया जा सकता है।

प्लाज़ा-द-सन-फ्रांसिस्को-

पुरातन हवाना की बन्दरगाह के सामने है -प्लाज़ा-द-सन-फ्रांसिस्को। सागर से आते शीतल हवाओं के झोंके पर्यटकों के तन-मन में नूतन ऊर्जा का संचरण कर देते हैं। घुमावदार चौराहों पर नयी भव्य इमारतें दिखाई देती हैं। दो इमारतें विशेष रूप से दर्शनीय हैं-‘लोंजा-द-कमर्शिओ के मध्य है चित्ताकर्षक गुंबद ,2-बेसेलिका-मेनोर-द-सन-फ्रांसिस्को-द-असीस की मीनार से नगर तथा सागर की सुंदर दृश्यावली दिखाई देती है। यहाँ पर संगीत कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। पूरे क्यूबा में बेसेलिका अपने उत्कृष्ट ध्वनि संयोजन के लिए ख्यात है। इसके मध्य है संगमरमर से बना फव्वारा-‘फ्यूएंटे-द-लो-लिओस’ किसी समय यहाँ से गुजरने वाले जहाज़ यहाँ से साफ, मीठा पानी लेते थे। 1836 ई में ग्युसेप गागिनी ने फव्वारे को देश को समर्पित कर इस का नाम ‘फाउंटेन ऑफ लायन्स’ रख दिया था।

काले ओबिस्पो-

अपने पुरातन इतिहास,समृद्ध स्थापत्यशैली तथा मनोरंजन स्थलों के लिए ‘काले ओबिस्पो’ पूरे क्यूबा में प्रसिद्ध है। यहाँ की संकरी सड़क सेंट्रल पार्क को प्लाज़ा-द-अर्मस से जोड़ती है। शाम के समय यहाँ की रौनक देखते ही बनती है। पर्यटक यहाँ पर ‘एल फ्लोरिडिता’ जैसे मशहूर रेस्टौरेंट्स में रंगीन शामें गुजारने आते हैं। बराक तथा नियोक्लासिक शैली में बनी भव्य इमारतें देखते हैं। होटल ‘एम्बोस मुंडोस’ भी प्रसिद्ध है। प्रख्यात लेखक अर्नेस्ट हेमिंग्वे इस होटल में सात साल तक रहे थे। टेक्विकल फार्मेसी म्यूज़ियम हर्बल औषधियों के लिए प्रसिद्ध है।

केस्टिलो-द-सन-सेल्वेडोर-द-ला-पुंटा-

सागरतट पर चहलकदमी करते, बन्दरगाह का सौंदर्य निहारते हुए जा पंहुचते हैं- ‘केस्टिलो-द-ला-सेल्वेडोर-द-ला-पुंटा। यहाँ का इतिहास प्राचीन और समृद्ध है। इसने हवाना की समुद्रतटीय सुरक्षा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसका 1589-1610 के बीच 21 वर्षों के अंतराल में निर्माण हुआ था तथा हवाना बन्दरगाह के पश्चिमी छोर पर स्थित है। हवाना के अन्य किलों के साथ तांबे और लकड़ी की मज़बूत ज़ंजीरों के साथ जुड़ा हुआ है। आक्रमण होने की स्थिति में इन ज़ंजीरों को कस दिया जाता था। फलस्वरूप शत्रु के जहाज़ बन्दरगाह में प्रवेश नहीं कर पाते थे। यहाँ का विशिष्ट दर्शनीय स्मारक है- घोड़े पर सवार जनरल मेक्सिमो गोमेज की प्रतिमा।

होटल इंगलेटेरा-

यह क्यूबा का सबसे पुराना होटल है। इसका निर्माण 1895 ई में हुआ था। यहाँ आने वाले लोगों में अनेक ख्यात लोगों के नाम शामिल हैं यथा-अन्ना पेवलोवा, जेम्स मार्टी, विंस्टन चर्चिल आदि। स्वतन्त्रता प्राप्ति से पहले यहाँ पर उदारवादी विचारों के व्यक्तियों की गोष्ठियाँ हुआ करती थी। एंटोनियो मेसियो ने यहीं पर बैठ कर क्यूबा की स्वतन्त्रता की योजना तैयार की थी। अब यह पर्यटकों के लिए सस्ता,सुविधासम्पन्न आवासस्थल है। यहाँ की विशाल बाल्कनी में आरामदेह कुर्सी पर बैठ कर इतिहासकार क्रांतिकाल में होटल की भूमिका के चिंतन में डूब जाते हैं।

विशिष्ट जानकारी-

हवाना के दक्षिणपश्चिम मे नौ मील दूर ‘जोस मार्टी’ अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट है। यह पूरे विश्व के साथ सम्बद्ध है। यहाँ से नगर में जाने के लिए शटल बस, कार व टैक्सी सुविधापूर्वक मिल जाती है।

पुरातन हवाना के विशिष्ट स्थलों का भ्रमण करने के इच्छुक पर्यटकों के लिए होटल ‘अम्बोस मुंडोस’ व होटल फ्लॉरिडा अधिक सुविधाजनक हैं। वैसे वहाँ पर बजट के अनुरूप अन्य आवासस्थल भी उपलब्ध हैं।

नगर में घूमने-फिरने के लिए सार्वजनिक परिवहन के अतिरिक्त टैक्सी तथा किराए की कार अन्य विकल्प है।

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प्रमीला गुप्ता

ग्रैंड प्लेस-ब्रसल्स-

ग्रोट मार्केट (डच) अथवा ग्रैंड प्लेस(फ्रेंच) बेल्जियम की राजधानी ब्रसल्स का केंद्रीय मार्केट स्क्वेयर है। इसके इर्द-गिर्द भवन, टाउन हाल व ब्रेड हाउस है। यह स्क्वेयर यूरोप के सर्वाधिक खूबसूरत टाउन स्क्वेयर में से एक है।

स्पेन के सम्राट की पुत्री आर्च डचेस इसाबेला अपनी ब्रसल्स यात्रा के दौरान 5 सितम्बर, 1599 ई को लिखती है-” मैंने शहर के टाउन स्क्वेयर, जहां पर टाउन हाल आकाश को छूता दिखाई देता है, जैसा सुंदर और चित्ताकर्षक स्थान पहले कभी नहीं देखा। घरों की सजावट अद्वितीय है। ”

पृष्ठभूमि-

सत्रहवीं सदी में निर्मित ब्रसल्स का ग्रैंड प्लेस भव्य, निजी तथा सार्वजनिक भवनों का समूह है। यहाँ महत्त्वपूर्ण राजनैतिक तथा व्यावसायिक केंद्र की स्थापत्यशैली में तत्कालीन सामाजिक, सांस्कृतिक जीवनस्तर की झलक स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।

इसको इस क्षेत्र की सामाजिक सांस्कृतिक विशेषताओं, जिनमें कलात्मक जीवनशैली,उच्चकोटिकी स्थापत्य शैली के सम्मिश्रण तथा सिद्धांतों के संरक्षण के लिए विश्वविरासत घोषित किया गया है। अपने उत्कर्ष काल में यह उत्तरी यूरोप के विकसित व्यावसायिक नगर के विकास तथा उपलब्धियों का जीवंत प्रमाण है।

मूलतः ग्रैंड प्लेस सेन नदी से निकलने वाले दो झरनों के बीच रेतीली भूमि था। लोगों ने रेतीली ज़मीन को ठीक-ठाक कर के लोअर मार्केट स्थापित कर दी। बारहवीं सदी के आते-आते ब्रसल्स ब्रग्स,कोलोन तथा फ्रांस के बीच व्यापारिक मार्ग बन गया। अंग्रेज़ी ऊन, फ्रेंच शराब तथा जर्मन बीयर मार्केट में तथा बन्दरगाह में बिकने लगी।

मध्यकाल के आरंभ में यहाँ पर लकड़ी के छोटे-छोटे घर बन गए। बाद में 14वीं शताब्दी में सम्पन्न-समृद्ध कुलीन परिवारों ने पत्थरों से बड़ी-बड़ी हवेलियों का निर्माण शुरू कर दिया। शीघ्र ही यह मार्केट नगर का प्रमुख वाणिज्यिकी तथा प्रशासनिक केंद्र बन गया। प्रारम्भ में ग्रैंड प्लेस 15वीं तथा 17वीं शताब्दी के मध्य विभिन्न स्थापत्यशैलियों में निर्मित भवनों का घालमेल था।

विशिष्ट दर्शनीय स्थल-

टाउन हाल-

इसका निर्माण 1402-1455 के बीच हुआ था। बास्तुकार जैकब- वन- थिनेन थे। गोथिक शैली में निर्मित टावर का डिजाइन जन-वन-रुस्ब्रोक ने किया था। टावर के 97 मीटर ऊंचे शिखर पर ब्रसल्स के संरक्षक सेंट माइकेल की प्रतिमा स्थित है। टाउन हाल के निर्माण के बाद ग्रैंड प्लेस का नगर के केंद्र में वाणिज्यिकी का योजनाबद्ध रूप से विस्तार हुआ। आसपास की गलियों में अभी भी पुराने समय की झलक दिखाई देती है। गलियों के नाम मक्खन,पनीर, मछली, कोयला बेचने वालों के नाम पर हैं।

ब्रेड हाउस-

टाउन हाल के सामने नवगोथिक शैली में निर्मित ‘ब्रेड हाउस’ है। अब इसमे ऐतिहासिक सिटी म्यूज़ियम है। डच नाम ‘ब्रेड हाउस’ से ही इस स्थान की पृष्ठभूमि की कल्पना की जा सकती है। तेरहवीं सदी में यहाँ पर एक लकड़ी के घर में बेकरी वाले ब्रेड बेचते थे। 1405 ई में लकड़ी से बने मूल ‘ब्रेड हाल’ के स्थान पर पत्थर की इमारत बन गयी।बेकरों ने अपना सामान घर-घर जा कर बेचना शुरू कर दिया। उस समय ब्रबंट के ड्यूक ने इस इमारत में प्रशासनिक कार्यालय स्थापित कर दिया। डची पर हैप्सबर्ग ने अधिकार कर लिया था। ड्यूक का यह घर ‘किंग’स हाउस’ बन गया था। अब यह इमारत ‘किंग’स हाउस’ के नाम से जानी जाती है। सम्राट चार्ल्स के शासनकाल में 1515-1536 के बीच ‘किंग’स हाउस’ का गोथिक शैली में पुनर्निर्माण करवाया गया था।

ब्रबंट के ड्यूक्स का घर-

House of the Dukes of Brabant ग्रैंड प्लेस में सात भवनों का समूह है। यह ‘ब्रबंट के ड्यूक्स का घर’ कहलाता है। प्रत्येक भवन की पहली मंज़िल की खिड़की के नीचे ड्यूक की प्रतिमा स्थित है। देखा जाए तो यहाँ पर कभी कोई ड्यूक अथवा राजा नहीं रहा। घरों के नाम भी अतीव रोचक हैं- The Fame,The Hermit,The Fortune, The Windmill,The Tinpot, The Hill, The Beurs। इन घरों को सामूहिक रूप में ड्यूक्स का घर कहा जाता है। सभी घरों का निर्माण मध्यकाल में नहीं हुआ था। कुछ घर तो सदैव निजी संपत्ति रहे। मध्यकाल तथा उसके बाद प्रत्येक नगर संघ अथवा निगम केअंतर्गत होते थे। इनकी प्रशासन में भागीदारी होती थी। इन के सदस्य अत्यधिक सम्पन्न तथा राजनैतिक रूप से प्रभावशाली होते थे। वे अपने घरों में नियमित रूप से एक साथ बैठकर व्यापार अथवा वाणिज्य संबंधी नियमों-विनियमों पर चर्चा करते थे।

बमबारी-

13 अगस्त 1695 ई को ड्यूक ऑफ विलेराय,मार्शल फ्रांसिस-द-न्यूफिले के नेतृत्व में 70,000 सैनिकों की फ्रेंच सेना ने फ्रेंच अधिकृत नमूर (अब दक्षिण बेल्जियम) से लीग ऑफ आग्स्बर्ग की सेनाओं को खदेड़ने के लिए ब्रसल्स पर आक्रमण कर दिया। फ्रेंच सेनाओं ने असहाय नगर केंद्र पर तोपों और गोलों से भारी बमबारी की, आग लगा दी। ग्रैंड प्लेस तथा आसपास के क्षेत्र को मिट्टी में मिला दिया। वैसे तो टाउन हाल प्रमुख निशाना था लेकिन 4,000 से ज़्यादा घर जल कर राख़ हो गए थे। टाउन हाल का पत्थर से बना कुछ भाग व अन्य कुछ इमारतों का नाममात्र का हिस्सा बच पाया था।

नव निर्माण-

विनाश के बाद अगले चार वर्षों में अनेक संगठनों ने मिलकर नगर का पुनर्निर्माण करवाया। उनके काम में नगर के काउंसिलर्स व ब्रसल्स के गवर्नर ने साथ दिया। इस के लिए संगठनों को अपनी योजना को अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत कर सहमति लेनी आवश्यक थी। परिणामस्वरूप ग्रैंड प्लेस का निर्माण योजनाबद्ध रूप से हुआ। प्रत्यक्ष में विरोधी स्थापत्य शैलियों-गोथिक,बराक तथा लुई चौदह शैली के होते हुए भी तालमेल बेहतर था।

19वीं सदी में पुनर्निर्माण-

बेल्जियन वासियों द्वारा स्वतन्त्रता प्राप्ति के लिए किए गए कड़े संघर्ष के बाद अंततः 1830 ई में डच सम्राट विलियम प्रथम ने बेल्जियन क्षेत्र छोड़ दिया। 1831 ई में बेल्जियन सम्राट लियोपोल्ड सिंहासन पर बैठे। ब्रसल्स को स्वतंत्र बेल्जियम की राजधानी बनाया। ब्रसल्स नगर के पुनर्निर्माण का कार्य आरंभ हुआ। नए भवन निर्मित किए गए। दीवारें तोड़ कर नगर का विस्तार किया गया।

1860 ई में ब्रसल्स के मेयर ने जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पड़े पुराने ‘किंग’स हाउस’ को खरीदने के लिए नगर अधिकारियों को तैयार कर लिया। पुरानी बिल्डिंग का पुनर्निर्माण करवाया गया। निर्माण तत्कालीन फैशनेबुल नयी गोथिक शैली में हुआ।

नवनिर्माण के उपरांत इस के ऐतिहासिक संरक्षण के चैंपियन के रूप में चार्ल्स बुल्स उभर कर सामने आए। 1881ई में उन्होने ब्रसल्स के मेयर का पदभार संभाला तथा 1899 ई तक पद पर बने रहे। उनकी अंतिम उपलब्धि थी लियोपोल्ड द्वितीय की आडंबरपूर्ण निर्माण योजनाओं का विरोध तथा ब्रसल्स के पुरातन भागों का संरक्षण। बुल्स ग्रैंड प्लेस के कट्टर समर्थक थे। उन्होने 1883 ई में पारित अधिनियम के माध्यम से ग्रैंड प्लेस के बाहरी भाग के संरक्षण तथा जीर्णोद्धार के लिए आवश्यक धन उपलबद्ध करवाया। यह काम 1883-1923 ई के बीच सम्पन्न हुआ। 1887 ई में किंग’स हाउस में सिटी म्यूज़ियम स्थापित किया गया। यहाँ पर टाउन हाल की मूल प्रतिमाएँ, दीवारों की टेपस्ट्री तथा नगर से सम्बद्ध शिल्पाकृतियाँ संग्रहीत हैं। 1899 ई में ब्रसल्स के नवनिर्माण में सम्मिलित प्रमुख वास्तुशिल्पियों ने नवनिर्मित भवन L’Etoile पर बुल्स की स्मृति में विक्टर ह्युगो द्वारा डिजाइन किया गया तथा विक्टर रूसो द्वारा निर्मित स्मारक स्थापित किया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम-

ग्रैंड प्लेस ब्रसल्समें आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम पर्यटकों के विशिष्ट आकर्षण का केंद्र है। यहाँ पर पूरा वर्ष नृत्य-संगीत व अन्य कार्यक्रमों का आयोजन होता रहता है। इनमें प्रमुख हैं- वार्षिक उत्सव ‘ओमेगंग’ तथा द्विवर्षीय फूलों का कालीन

ओमेगंग-

जुलाई मास के पहले रविवार को ग्रैंड प्लेस में रंग-बिरंगे परिधानों में सज-धज कर शोभायात्रा निकाली जाती है। 1549 ई में चार्ल्स पंचम, उसके पुत्र डॉन फिलिप, बहिनों-फ्रांस की साम्राज्ञी, आस्ट्रिया की एलियेनोर तथा हंगरी की मेरी के स्वागत में पहली बार शोभायात्रा निकाली गयी थी । उसके बाद से यह उसकी ऐतिहासिक पुनरावृत्ति है। ओमेगंग का वर्णन 1359 ई में भी मिलता है परंतु उस समय यह शोभायात्रा धार्मिक होती थी। अब यह धार्मिक न हो कर केवल लोकप्रथाओं पर आधारित है।

फूलों का कालीन-

प्रत्येक दो वर्ष में ग्रैंड प्लेस को फूलों के कालीन से सजाया जाता है। 300 वर्ग मीटर क्षेत्र को 80,000 ताज़ा बेगोनिया के फूलों से ढक दिया जाता है। वह स्थान सुंदर, कोमल कालीन की तरह मनमोहक दिखाई देता है। कलाकार घास से ढकी ज़मीन पर साँचों से केवल चार घंटे में खूबसूरत डिजाइन बना देते हैं। गर्मी होने के कारण घास में पहले पानी देना पड़ता है। गीली ज़मीन होने के कारण चार दिन में ही कई से. मी घास उग आती है। यह लैंडस्केप आर्किटेक्ट ई.स्टोटेमन्स के दिमाग की उपज थी। 1971 ई में उसने पहली बार फूलों का कालीन बनाया था। वास्तव में वह अपने साथियों के साथ वेस्ट इंडीज में उगने वाले खूबसूरत बेगोनिया के फूलों को लोकप्रिय बनाना चाहता था। 1860 ई में घेंट के समीप इन फूलों को उगाया जा रहा था। उस पहले कालीन ने ही दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। फिर क्या था? हर दो साल बाद ग्रैंड प्लेस में फूलों का कालीन बिछ जाता है। इस अवसर पर पर्यटक भी भारी संख्या में मौजूद रहते हैं।

बेल्जियम यूरोप में नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर देश है। ग्रैंड प्लेस के अतिरिक्त भी वहाँ पर देखने के लिए बहुत कुछ है। बेल्जियम की राजधानी ब्रसल्स पूरे विश्व के साथ हवाई मार्ग से जुड़ी है।

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प्रमीला गुप्ता