आचेन का पवित्र कैथेड्रल-जर्मनी

ऐतिहासिक,स्थापत्यशैली तथा धार्मिक दृष्टिकोण से 805 ई में निर्मित आचेन स्थित विश्व प्रसिद्ध इम्पीरियल कैथेड्रल अत्यधिक महत्त्वपूर्ण संरचना है। जर्मनी की चर्च स्थापत्यशैली पर इसके अद्वितीय डिज़ाइन का प्रभाव परिलक्षित होता है। सदियों तक यहाँ पर राज्याभिषेक होते रहे तथा श्रद्धालु पवित्र तीर्थस्थल के रूप में यहाँ की यात्रा करते रहे।

आचेन कैथेड्रल जर्मनी के प्राचीनतम चर्चों में से एक है। इसमें मध्यकालीन अमूल्य कोष संग्रहीत है। इनमें चार्ल्मग्न का राजसिंहासन (800ई) ; स्वर्णिम वेदी (1000ई); प्रवचन मंच (1020ई); चार्ल्मग्न की स्वर्णिम समाधि (1215ई) तथा वर्जिन मेरी की समाधि (1238ई) उल्लेखनीय हैं। अंतिम समाधि में अतीव प्रभावशाली स्मृतिचिन्ह संग्रहीत हैं तथा आज भी तीर्थयात्रियों के आकर्षण का केंद्र हैं। भव्य कैथेड्रल के कोषागार में भी अनेक बहुमूल्य वस्तुएँ प्रदर्शित हैं।

प्रथम पवित्र रोमन सम्राट चार्ल्मग्न ने 786 ई में राजप्रासाद में गिरजाघर का निर्माण आरंभ करवाया था। राजप्रासाद में निर्मित गिरजाघर ‘ करोलिंगीयन’ स्थापत्यशैली का उत्कृष्ट नमूना है। 1978 ई में यूनेस्को ने इसको विश्वविरासत की सूची में सम्मिलित कर लिया था। आचेन के चार्ल्मग्न के विशाल राजप्रासाद में अब यही दर्शनीय कैथेड्रल शेष बचा है।

कैथेड्रल का डिज़ाइन-

पैलेस के कैथेड्रल का डिज़ाइन मेटज़ के ओडो ने तैयार किया था। उसने इटली में रवेना स्थित बाइजेंटाइन शैली में निर्मित ‘सन वितले’ के चर्च के अनुरूप डिज़ाइन तैयार किया था। फलस्वरूप गिरजाघर की अष्टकोणीय आकृति, धारीदार मेहराब, संगमरमर के फ़र्शों की स्वर्णिम नक्काशी को देख कर आनंद की अपूर्व अनुभूति होती है। 805 ई में इसको इम्पीरियल चर्च के रूप में प्रतिष्ठित कर दिया गया था।

स्मृतिचिन्ह-

चार्ल्मग्न ने अपने जीवनकाल में यहाँ पर अनेक स्मृतिचिन्ह संग्रहीत किए थे। वे स्मृतिचिन्ह आज भी कैथेड्रल में संरक्षित रखे हैं। इनमें सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण एवं दर्शनीय है-

1- दिव्य वर्जिन का परिधान

2- बाल यीशु के कपड़े

3- सलीब पर लटके यीशु

4- धड़ से अलग होने के बाद जिस कपड़े पर बाप्तिस्त संत जॉन का सिर रखा था।

मध्यकाल में इन स्मृतिचिन्हों को देखने के लिए जर्मनी, आस्ट्रिया, हंगरी, इंग्लैंड, स्वीडन तथा अन्य देशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते थे। 14वीं शताब्दी के मध्य इन चार भव्य स्मृतिचिन्हों को सात वर्ष के अंतराल पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की प्रथा चल पड़ी। यह प्रथा आज भी कायम है।

चार्ल्मग्न की समाधि-

चार्ल्मग्न की 814 ई में मृत्यु के बाद उसके शव को गिरजाघर के गायक मंडली के कक्ष में समाधिस्थ कर दिया गया था। 1000 ई में सम्राट ओटो तृतीय ने चार्ल्मग्न की शवपेटिका को खुलवाया। कहा जाता है कि शवपेटिका में उनका शव आश्चर्यजनक रूप से संरक्षित था। वे संगमरमर के राजसिंहासन पर राजसी परिधान तथा सिर पर ताज रखे हुए बैठे थे। उनकी गोद में बाइबल के अंश तथा हाथ में राजदंड था। टाउन हाल के विशाल कमरे की दीवार पर उनको देख रहे सम्राट ओटो व अन्य राजदरबारियों का भित्तिचित्र उत्कीर्ण है।

सम्राट फ्रेडेरिक बरबारोसा ने 1168 ई मेंचार्ल्मग्न की शवपेटिका को दोबारा खुलवाया तथा अस्थिवशेषों को पेरीयन संगमरमर की नक्काशीदार शवपेटिका में रखवाया। सम्राट बरबारोसा के अनुरोध पर चार्ल्मग्न को उसी वर्ष संत घोषित कर दिया गया। वर्ष 1168 में सम्राट बरबारोसा ने समाधि के ऊपर एक भव्य फानूस टंगवाया जो आज भी संरक्षित है। 1215ई में फ्रेडेरिक द्वितीय ने चार्ल्मग्न की अस्थियों को भव्य स्वर्णिम समाधि में रखवाया। मूलरूप से अस्थियाँ अष्टकोणीय हाल में फानूस के नीचे रखी हुई थीं। दस वर्ष बाद चार्टेरस कैथेड्रल में चार्ल्मग्न की स्मृति में एक भव्य खिड़की का निर्माण करवाया गया।

वर्ष 1349 में चार्ल्मग्न के अस्थिवशेषों व अन्य स्मृति चिन्हों को प्रदर्शित करने के लिए दो पृथक स्थान बनाए गए। चार्ल्स चतुर्थ ने चार्ल के पवित्र अवशेष स्थल पर चार्ल्मग्न की अस्थियाँ व उनकी एक अर्ध प्रतिमा स्थापित करवायी। ये दोनों कोषागार में प्रदर्शित हैं। 1474 ई से चार्ल्मग्न फ्रेंच सम्राटों के पूर्वजों के रूप में पुजनीय हैं।

गायक भवन-

इस बीच पैलेस के गिरजाघर के गायक भवन का गोथिक स्थापत्यशैली में पुनर्निर्माण किया गया। काँच के नवनिर्मित गिरजाघर को 1414ई में चार्ल्मग्न की 600वीं पुण्यजयंती पर प्रतिष्ठित किया गया था। सम्राट की समाधि को गायक भवन के पूर्वी छोर पर खिसका दिया गया था। आज भी यह वहीं पर है।

वर्तमान आचेन कैथेड्रल-

15वीं शताब्दी में तीर्थयात्रियों की भीड़ में वृद्धि देख कर अन्य कई छोटे गिरजाघर व प्रकोष्ठ निर्मित किए गए। यह विशाल परिसर ही वर्तमान में आचेन कैथेड्रल के नाम से प्रसिद्ध है। सौभाग्य से दोनों विश्व युद्धों में कैथेड्रल को कोई विशेष क्षति नहीं पंहुची। 1978 ई में यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में सम्मिलित होने वाले 12 स्थलों में से यह एक था। यूरोप के तीन तथा जर्मनी का एकमात्र स्थल था। जीर्णोद्धार कार्य दो सदियो में 2006 ई में पूरा हुआ।

अष्टकोणीय प्रतीक-

आचेन कैथेड्रल का गुंबद अष्टकोणीय आकार में निर्मित है। चार्ल्मग्न ‘आठ’ की संख्या को अत्यधिक महत्त्व देता था। इसीलिए वेदी के ऊपर का गुंबद अष्टकोणीय है। बाइबल में भी आठ का अंक अधिक दिखाई देता है तथा मध्यकाल में इसे ईसाई धर्म का प्रतीक माना जाता था। एक पूर्ण चक्र को मध्य से चतुर्भुजाकार में काट देने पर अष्टकोण बन जाता है। पूर्णचक्र ईश्वरीय सत्ता का प्रतीक है जब कि चतुर्भुज भौतिक संसार का प्रतिनिधित्व करता है। चार कोने स्वर्ग की चार दिशाओं तथा चार मानवीय गुणों को दर्शाते हैं। चार्ल्स्मग्न ने आठ के अंक में फ्रैंक्स तथा रोमन साम्राज्य; लौकिक एवं पारलौकिक दोनों के शासक तथा शक्ति को निहित देखा। दसवीं सदी में निर्मित राजसिंहासन वेदी के पीछे स्थित है। उसके दोनों हाथों के स्मृतिचिन्ह लौकिक, पारलौकिक जगत की शक्ति के द्योतक हैं। दायें हाथ में लौकिक जगत का प्रतीक राजदंड है तो बायें हाथ में पारलौकिक जगत का प्रतीक गोलाकार चक्र है।

दर्शनीय स्थल-

पश्चिम का बाहरी भाग-

पश्चिमी भाग करोलिंगीयन शैली में निर्मित है। मूल सीढ़ियाँ तथा आले अभी भी संरक्षित हैं। पोर्च का निर्माण 17वीं सदी में तथा पश्चिमी गुंबद का ऊपरी भाग 1879-1884 के बीच निर्मित हुआ था। भव्य पश्चिमी कांस्य प्रवेश द्वार ‘वोल्फ डोर्स’ के नाम से प्रसिद्ध है। ये पुराने मॉडलों की अनुकृतियाँ है तथा इन का वज़न चार टन है। वर्तमान में भीतर जाने के लिए दायीं तरफ एक छोटा, सामान्य सा प्रवेशद्वार है। प्रवेश द्वार के बाद हाल में दूसरी सदी में निर्मित मादा भेड़िये की दो कांस्य प्रतिमाएँ तथा 1000 ई का पुराना विशाल देवदार शंकु (Pinecone)खड़ा है।

राजकीय गिरजाघर –

विश्व में करोलिंगीयन स्थापत्य शैली में निर्मित गिरजाघरों में आचेन कैथेड्रल सर्वाधिक संरक्षित है। अपने विशिष्ट अष्टकोणीय केंद्र के कारण यह अष्टभुज कहलाता है। करोलिंगीयन कालीन स्तम्भ एवं गैलेरी के कांस्य द्वार मौलिक हैं परंतु मूल नक्काशी नष्ट हो गयी है। खूबसूरत संगमरमर के फर्श का निर्माण-काल 1913 ई है। गिरजाघर के केंद्रीय गुंबद से विशाल (4. 2 मीटर) व्यास का कांस्य चक्र , बरबारोसा फानूस लटक रहा है। चार्ल्मग्न को संत की उपाधि मिलने के उपलक्ष्य में फ्रेडेरिक बरबारोसा ने इसको स्थापित करवाया था। 1165-84 के बीच यह आचेन में तैयार किया गया था और बरबारोसा व उसकी पत्नी ने इसको वर्जिन मेरी को समर्पित किया था। विशेष अवसरों पर इसमें मोमबत्तियाँ जला कर प्रकाश किया जाता है जो अतीव मुग्धकारी दिखाई देता है।

फानूस का डिजाइन अलौकिक यरूशलम का प्रतिनिधित्व करता है। यह ईश्वरीय परिकल्पना पर आधारित है लेकिन इसमें केवल आठ स्तम्भ हैं जबकि ईश्वरीय वाणी में दस स्तंभों का वर्णन है। अष्टभुज के गुंबद की भव्य नक्काशी अत्यधिक चित्ताकर्षक है। उसमें प्रभु यीशु को 24 देवदूतों से घिरे हुए दिखाया गया है। आधारशिला से अष्टभुज पर 31 मीटर की ऊंचाई पर गुंबद शोभायमान है। सदियों तक इसको उत्तरी यूरोप का सर्वोच्च गुंबद होने का गौरव प्राप्त होता रहा।

अष्टभुज में वेदी के दायीं तरफ ‘अवर लेडी ऑफ आचेन’ हाथों में नन्हें, चंचल यीशु को लिए खड़ी हैं। प्रतिमा का निर्माण काल 14वीं सदी है। वह कैथेड्रल के संरक्षक देव का प्रतिनिधित्व करती है तथा उसमें चमत्कारिक शक्ति है। 17 वीं सदी से उन पर वस्त्र तथा आभूषण चढ़ाने का प्रचलन है।

ऊपरी गैलेरी में संगमरमर का भव्य राजसिंहासन दर्शनीय है। इस पर 936-1531 ई के बीच 32 पवित्र रोमन सम्राटों का राज्याभिषेक हुआ था। यह राजसिंहासन करोलिंगीयन कालीन है। मान्यता के अनुसार सम्राट चार्ल्मग्न भी राजसिंहासन पर बैठता था यद्यपि उसका राज्याभिषेक रोम में हुआ था। संगमरमर की छह सीढ़ियों के ऊपर स्थित राजसिंहासन पुराने संगमरमर से बना सामान्य सिंहासन है।

गैलेरी के सुंदर स्तम्भ पूर्णरूप से अलंकृत हैं। चार्ल्मग्न ने 32 स्तंभों को रोम तथा रवेना की पुरानी इमारतों से मंगवाया था। उनमें से अधिकांश को फ्रेंच क्रान्ति के समय लूट लिया गया था। बाद में उनमें से 22 स्तंभों को वापिस ला कर गैलेरी में पुनर्स्थापित कर दिया गया। स्तंभों के बीच की जालियों का निर्माण भी चार्ल्मग्न के समय में हुआ था। उन पर रोमन,केल्टिक तथा फ्रेंकिश प्रभाव को दर्शाती खूबसूरत आकृतियाँ बनी हैं।

गोथिक गायक भवन तथा कोषागार-

वेदी के आगे 1414 ई में गोथिक शैली में निर्मित गायक भवन (काँच का गिरजाघर) मुग्धकारी दर्शनीय स्थल है। दीवारों में 100 फीट ऊंची रंग-बिरंगी खिड़कियाँ लगी हैं। मूल खिड़कियां आग में बुरी तरह जल गयी थी, द्वितीय विश्व युद्ध की बमबारी में पूरी तरह नष्ट हो गयी। 1950 ई में काँच की नयी रंग-बिरंगी खिड़कियाँ लगाई गयी।

अष्टभुज के सामने प्रमुख वेदी ‘ पला-द-आरो’ नामक भव्य स्वर्णिम द्वार है। इसका निर्माण काल 1000 ई है। स्वर्णिम पैनल लकड़ी के फ्रेम में जड़े हैं। ‘पला-द-आरो’,’मंडोरला’ ( बादाम के आकार का आभामंडल) के मध्य दाढ़ीविहीन यीशु बैठे हैं, एक हाथ में क्रास पकड़ कर आशीर्वाद दे रहे हैं और दूसरे हाथ में पुस्तक ले रखी है। उनके साथ वर्जिन मेरी, संत माइकेल व बाइबल के चार लेखकों के प्रतीक के रूप में चार छोटे पदक उत्कीर्ण हैं। दस अन्य पैनलों पर यीशु के मनोभावों का चित्रण है।

गायक भवन के समीप दायीं तरफ एक अन्य खजाना है-सोने का भव्य प्रवचन मंच। 1020 ई में निर्मित इसको सम्राट हेनेरिक द्वितीय ने प्रतिस्थापित किया था। स्वर्णजड़ित मंच पर हीरे,जवाहरात, बहुमूल्य रत्न लगे हैं। इनमें पुराने काँच के कटोरे भी हैं। केवल पात्र ही असामान्य नहीं हैं अपितु इसमें मिस्र की हाथीदांत से बनी छह सुंदर मूर्तियाँ भी हैं।

गोथिक गायक भवन में काँच के बॉक्स में रखी दो स्वर्णिम समाधियाँ हैं। अष्टभुज के समीप वर्जिन मेरी की समाधि है, पिछवाड़े में चार्ल्मग्न की समाधि है। वर्जिन मेरी की समाधि का निर्माणकार्य 1238 ई में पूरा हुआ था। इसमें उपरोक्त आचेन के चार भव्य स्मृति चिन्ह संरक्षित हैं। अंतिम छोर पर यीशु तथा पोप लियो तृतीय की प्रतिमाएँ हैं। लम्बी तरफ के कोनों पर सामने की तरफ मेडोना, शिशु तथा चार्ल्मग्न के चित्र उत्कीर्ण हैं। शेष लम्बाई पर 12 देवदूतों के चित्र उत्कीर्ण हैं। छत के पैनलों पर मेरी के जीवन से सम्बद्ध चित्र अंकित हैं।

चार्ल्मग्न की समाधि का निर्माण 1215 ई में हुआ था। इसमें अभी भी सम्राट के अस्थिवशेष संरक्षित हैं। सामने वाले कोने पर चार्ल्मग्न को पोप लियो तृतीय तथा राजदरबार के सदस्य रेम्स के आर्कबिशप टुर्पीन के बीच सिंहासन पर बैठे हुए दिखाया गया है। ऊपर से प्रभु यीशु सम्राट को आशीर्वाद दे रहे हैं।

समाधि की लम्बाई में चार्ल्मग्न तथा फ्रेडेरिक द्वितीय के मध्य शासन करने वाले 16 सम्राटों के चित्र उत्कीर्ण हैं। दूसरे कोने पर वर्जिन मेरी श्रेष्ठ देवदूतों गैब्रियल तथा माइकेल के साथ चित्रित हैं। उनके ऊपर विश्वास,दया, आशा के विशिष्ट गुण अंकित हैं। छत पर चार्ल्मग्न के जीवन से सम्बद्ध ,विशेष रूप से मूर्स के साथ संघर्ष के चित्र उत्कीर्ण हैं। एक चित्र में उन्हें राजकीय गिरजाघर को वर्जिन मेरी को समर्पित करते हुए दिखाया गया है।

1420 ई में पूर्ण किए गए रंगीन काँच की खिड़कियों के मध्य के स्तंभों पर 14 प्रतिमाएँ स्थित हैं- वर्जिन मेरी, 12 देवदूत तथा चार्ल्मग्न की प्रतिमाएँ। गुंबद के ऊपर छत पर भव्य आकृतियाँ चित्रित हैं। गायक भवन की दीवारों पर बाइबल से उद्धृत भित्तिचित्र (1880-!913) उत्कीर्ण हैं।

आचेन नगर में भव्य आचेन कैथेड्रल के अतिरिक्त भी अन्य कई दर्शनीय स्थल हैं। यह सम्पूर्ण विश्व के साथ हवाई मार्ग से जुड़ा है। आचेन का MST एयरपोर्ट प्रमुख नगरों के साथ सम्बद्ध है तथा कुछ ही समय में आचेन पंहुचा जा सकता है। जर्मनी के डसलडोर्फ तथा फ्रैंकफ़र्ट अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट MST से जुड़े हैं। फ्रेंकफ़र्ट, कोलोन, ब्रसल्स तथा पैरिस से तीव्र गति वाली ट्रेन भी चलती है।

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प्रमीला गुप्ता

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