पैरिस का ऐतिहासिक नोटरे-डेम-कैथेडरल-

दुनिया का खूबसूरत शहर,फ्रांस की राजधानी,पैरिस। सीन नदी के तट पर स्थित पैरिस शहर के केंद्र में है गोथिकस्थापत्यशैली में निर्मित विश्व विख्यात ‘नोटरे -डेम-कैथेडरल। 1991 ई में यूनेस्को ने अनेक अद्वितीयस संरचनाओं सहित पैरिस नगर को विश्व विरासत घोषित कर दिया था। नोटरे-डेम-कैथेडरल भी उन अद्वितीय संरचनाओं में से एक है। प्रारम्भ में इस स्थान पर रोमनवासियों द्वारा ज्यूपिटर का मंदिर था। उसके बाद यहाँ पर क्रिश्चियन गिरजाघर का निर्माण हुआ। तत्पश्चात 528 ई में चाइल्डबर्ट ने यहाँ पर सेंट एंटीयन का चर्च निर्मित करवाया।

पैरिस नगर नित्यप्रति विकसित हो रहा था,जनसंख्या में वृद्धि हो रही थी। तब पैरिस के बिशप मारिस-द-सली ने ‘वर्जिन मेरी’ को समर्पित विशाल नए चर्च के निर्माण की योजना बनाई। चर्च का निर्माणकार्य 1163 ई में प्रारम्भ हो गया था लेकिन इसको पूरा होने में 180 वर्ष लग गए। 1345 ई में निर्माण कार्य पूरा हुआ। उस अज्ञानता, अशिक्षा के समय में भी कैथेडरल के प्रवेशद्वारों पर तथा रंगीन काँच की खिड़कियों पर बाइबल से उद्धृत चित्र व आख्यान उत्कीर्ण हैं।

1183 ई में कैथेडरल में गायक मंडली के लिए बैठने का कक्ष बन जाने के बाद मध्य भाग का निर्माण कार्य शुरू हुआ जो 1208 ई में पूरा हुआ। पश्चिम के बाहरी भाग तथा गुंबदों का निर्माण 1225-1250 ई के बीच पूरा हुआ। 1235-50 के मध्य केंद्र में अन्य कई गिरजाघर निर्मित किए गए। 1250-67 ई के बीच जीन-द- चेलेस तथा पियरे-द- मोंट्रियल ने गलियारों तथा 1296-1330 के मध्य पियरे-द-चेलेस व जीन रेवी ने पूर्वी छोर का मेहराबदार भाग निर्मित करवाया। भित्तियों पर प्रारम्भिक गोथिक शैली में महीन नक्काशी उत्कीर्ण है।

इतिहास-

नोटरे-डेम कैथेडरल का इतिहास सदियों पुराना तथा संघर्षपूर्ण है। प्रारम्भ में धर्मयुद्ध पर प्रस्थान करने से पहले योद्धा यहाँ पर प्रार्थना करने के लिए आते थे। कैथेडरल के भीतर मधुर ध्वन्यात्मक संगीत का जन्म हुआ। फ्रेंच क्रान्ति के समय क्रांतिकारियों ने पूरे फ्रांस के कैथेडरलों के साथ नोटरे-डेम को भी तहस-नहस कर डाला। पश्चिम द्वार के ऊपर निर्मित संतों की प्रतिमाओं को जनसमूह ने सम्राटों की प्रतिमाएँ समझ कर खंडित कर डाला। कैथेडरल की बहुमूल्य वस्तुओं को या तो नष्ट कर दिया या फिर लूट लिया। केवल विशाल घंटे ही संरक्षित रहे। क्रांतिकारियों ने पहले तो कैथेडरल में तर्क सम्प्रदाय की स्थापना की बाद में इसको ईश्वर को समर्पित कर दिया। नेपोलियन प्रथम ने इसी कैथेडरल में राजसत्ता को चर्च के ऊपर अधिमान्यता प्रदान की । अपने सिर पर स्वयं ही सम्राट का ताज रखा,उसके बाद अपनी पत्नी, साम्राज्ञी को ताज पहनाया। उस समय यह कार्य आर्कबिशप करता था। उस अवसर पर उपस्थित पोप पायस पंचम ने भी इस पर किसी प्रकार की आपत्ति नहीं की। 18वीं सदी के युवा साहित्यकारों ने इन मध्यकालीन संरचनाओं को उपेक्षा की दृष्टि से देखा। यही नहीं कैथेडरल में रंगीन काँच के स्थान पर सादे काँच के शीशे लगवा दिये। 19वीं सदी के रोमांटिक कलाकारों, साहित्यकारों ने इस भव्य संरचना को नए दृष्टिकोण से देखा। 19वीं सदी के विक्टर ह्यूगो तथा इंग्रेस जैसे प्रख्यात साहित्यकारों व कलाकारों ने कैथेडरल की दुर्दशा के प्रति जनसामान्य का ध्यान आकर्षित किया तथा इसके संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न की। 1844 ई में कैथेडरल का पुनर्निर्माण कार्य आरंभ हुआ जो तीन साल तक चला। यूजेन एमेन्यूल, वायलट-ल-डक ने केंद्र के पूर्वी भाग की खिड़कियों को पुनर्निर्मित करवाया, पश्चिमी दिशा के बाहरी भाग की ध्वस्त प्रतिमाओं का भी पुनर्निर्माण करवाया।

गुलाबी रंग की खिड़कियों तथा प्रतिमाओं की पुनर्स्थापना के बाद वायलट-ल-डक ने अपनी वैज्ञानिक सोच तथा सृजनशीलता के आधार पर नोटरे-डेम के ऊपर गुंबद बनवाए, पवित्र बर्तनों को रखने के लिए भी स्थान बनवाया। 19वीं शताब्दी में बैरन हाउसमन ने कैथेडरल की मनमोहक दृश्यावली को अवरुद्ध करने वाली आसपास की इमारतों को तुड़वा दिया।

1871 ई में विप्लवकारियों ने कैथेडरल में आग लगा दी। भीतर रखी कुर्सियों का ढेर आग में जल कर राख़ हो गया लेकिन कैथेडरल को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पंहुचा। 1768 ई में भूगोलविदों ने निर्णय लिया कि फ्रांस के किसी भी स्थान की दूरी का मापन केंद्र नोटरे-डेम कैथेडरल होगा। 176 वर्ष बाद द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के उपरांत फ्रांस स्वतंत्र हुआ। तब वापिस लौटने पर जनरल-द- गाल ने कैथेडरल में धन्यवादस्वरूप प्रार्थना की थी। नोटरे-डेम आज भी फ्रांस का केंद्रस्थल माना जाता है।

स्थापत्य कला-

इतिहास की अपेक्षा कैथेडरल की स्थापत्यकला अधिक दर्शनीय व मुग्धकारी है। विश्व के व्यस्ततम नगर पैरिस में स्थित होने के कारण यह पर्यटकों का सर्वाधिक लोकप्रिय आकर्षण है। किसी अन्य कैथेडरल की तुलना में यहाँ पर अधिक पर्यटक आते हैं।

नोटरे-डेम का बाहरी अलंकृत, नक्काशीदार भाग विश्व विख्यात एवं लोकप्रिय है। इसका चित्र अधिकांश पोस्टकार्डों व ट्रैवल गाइड्स पर मुद्रित है। इसका कारण तत्कालीन स्थापत्यशैली में दिखाई न देने वाला बाहरी भाग में डिजाइन की समरूपता तथा उत्कृष्ट शिल्प है।

विशाल प्लाज़ा-

19वीं सदी में हाउसमन द्वारा डिजाइन किए गए नोटरे-डेम के विशाल प्लाज़ा से कैथेडरल के बाहरी तीन भव्य नक्काशीदार प्रवेश द्वार दिखाई देते हैं। यद्यपि इन का निर्माण 13 वीं शताब्दी में हो चुका था तथापि बाद में अधिकांश प्रतिमाएँ व नक्काशी नष्ट हो गयी थी। बाद में उन का पुनर्निर्माण किया गया। प्रवेशद्वार पूर्णरूप से सममित (सिमीट्रिकल) नहीं हैं। मध्यकालीन स्थापत्यकला में सममिति का होना अनिवार्य नहीं था।

बायाँ प्रवेशद्वार-

इस प्रवेशद्वार पर वर्जिन मेरी के जीवन से सम्बद्ध चित्रों के साथ-साथ राज्याभिषेक का चित्र व खगोलीय कैलेंडर भी चित्रित है।

केंद्र का प्रवेशद्वार-

इस द्वार पर अंतिम निर्णय (Last Judgement) को सीधे अलंकृत,नक्काशीदार चित्रों में उकेरा गया है। पहले तथा दूसरे पैनल पर पुनर्जीवित होने,अंतिम निर्णय, प्रभु यीशु का अन्य देवदूतों के साथ के चित्र उत्कीर्ण हैं। सिंहासन पर बैठे प्रभु का चित्र अत्यधिक भावपूर्ण है।

दायाँ प्रवेशद्वार-

यहाँ पर सेंट एंटीयन का चित्र उत्कीगर्ण है। इसके अतिरिक्त 12वीं सदी की सर्वोत्कृष्ट प्रतिमाओं का चित्रण है। इन में वर्जिन मेरी का अपने शिशु यीशु को गोद में लेकर सिंहासन बैठे हुए भी चित्रण है।

गैलेरी-

तीनों प्रवेशद्वारों के ऊपर एक गैलेरी में जुडाई तथा इज़राइल के 28 सम्राटों की एक कतार में प्रतिमाएँ स्थित हैं। ये मूल कृतियों की प्रतिकृतियाँ हैं। मूल कृतियाँ क्रान्ति के समय खंडित कर दी गयी थी।

पश्चिम की रोज़ विंडोज़-

कैथेडरल के पीछे पश्चिम में रोज़ विंडोज़ हैं। इन का व्यास 10 मीटर है। उस समय ये विंडोज़ अपनी तरह की विशिष्ट विंडोज़ थी। समीप जाने पर इन के बाहरी किनारे पर बाइबल से उद्धृत आदम और ईव के चित्र दिखाई देते हैं।

बाहरी भाग का ऊपरी हिस्सा-

गुंबदों से पहले एक विशाल गैलेरी है। यह दोनों गुंबदों को आधार से जोड़ती है। इस गैलेरी में भयावह दैत्य,दैत्याकार पक्षी दिखाई देते हैं। ये नीचे से नहीं दिखाई देते हैं। नोटरे-डेम के चित्ताकर्षक,अलंकृत गुंबद विश्व प्रसिद्ध हैं। इसका श्रेय 19वीं सदी के कालजयी फ्रेंच साहित्यकार विक्टर ह्यूगो को जाता है। उनकी प्रसिद्ध कृति ‘The Hunchback of Notre-dem)’ नोटरे-डेम का कुबड़ा) का मुख्य पात्र कुबड़ा क्वासिमिडो कैथेडरल के दक्षिणी गुंबद पर रहता है। ये गुंबद 68 मीटर ऊंचे हैं। यहाँ से सीन नदी तथा पैरिस नगर की मुग्धकारी दृश्यावली दिखाई देती है। गुंबद के शिखर तक जाने के लिए 402 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं।

उत्तरी, दक्षिणी व पिछला भाग-

प्रायः पर्यटक इस भाग की अनदेखी कर देते हैं। वास्तव में कैथेडरल का उत्तरी, दक्षिणी तथा पिछला भाग भी बेहद खूबसूरत है। यहाँ पर 13वीं सदी में निर्मित वर्जिन मेरी की प्रतिमा स्थित है। दुर्भाग्यवश उनकी गोद में बैठे प्रभु यीशु की प्रतिमा 18वीं सदी में खंडित कर दी गयी थी तथा उसका पुनर्निर्माण नहीं हो पाया। पिछला भाग भी निश्चित रूप से बाहरी भाग की तरह चित्ताकर्षक है। यहाँ पर उड़ते पक्षियों की आकृतियाँ देखते ही बनती हैं। मुख्य बाहरी भाग के दायीं ओर सेंट एंटीयन चर्च का प्रवेशद्वार है।

आंतरिक भाग –

मध्यकालीन वास्तुकार प्रायः स्वर्ग की तुलना में सांसारिक नश्वरता को अपनी संरचनाओं में प्रतिबिम्बित करते थे। नोटरे-डेम में भी भौतिकता तथा पारलौकिकता का चित्रण स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। विशाल सभागार, नक्काशीदार छतें,उनमें रंगीन काँच से छन कर आता अलौकिक प्रकाश मानवीय तथा दैवी ऊर्जा का अपूर्व सम्मिश्रण है। कैथेडरल की ऊपरी मंज़िलों पर पंहुचने का कोई मार्ग नहीं है। नीचे से ही ऊपर के अलौलिक सौंदर्य का आनंद लिया जा सकता है।

रंगीन काँच की तीन रोज़ विंडोज़-

ये कैथेडरल के आंतरिक भाग की अद्वितीय आकर्षण हैं। दो खिड़कियाँ क्रूसागार भाग में हैं। उत्तर की रोज़ विंडो का निर्माणकाल 13वीं सदी है। यह खिड़की सर्वाधिक मनोहारी है। इसमें वर्जिन मेरी के चारों ओर पुरातन टेस्टामेंट से उद्धृत चित्र उत्कीर्ण हैं। दक्षिण की रोज़ विंडो में संतों तथा देवदूतों से घिरे प्रभु यीशु का चित्र है। रंगीन काँच की ये खिड़कियाँ 1965 ई से कैथेडरल को शोभायमान कर रही हैं।

1990 ई में नोटरे-डेम के वाद्य यंत्रों को ठीक किया गया। इन की गणना फ्रांस के सर्वाधिक विशाल वाद्य यंत्रों में होती है। प्रार्थना सभा में इन का मधुर संगीत तन-मन के साथ-साथ आत्मा को तृप्त कर देता है। यहाँ पर वर्जिन मेरी, यीशु की प्रतिमा के साथ अनेक संतों के स्मारक भी स्थित हैं।

कोषागार-

कैथेडरल के पिछवाड़े में कोषागार है। इसमें बहुमूल्य वस्तुएँ, सोने व अन्य कीमती धातुओं से निर्मित मुकुट तथा सलीबें संरक्षित हैं।

म्यूज़ियम-

1960ई तक कैथेडरल के सामने इमारतों का जमावड़ा था।इन के कारण कैथेडरल की दृश्यावली अवरुद्ध होती थी। अंततः इन इमारतों को ढहा दिया गया। खुदाई में गैलो-रोमन काल से लेकर 19वीं सदी तक के पुरातत्त्वशेष प्राप्त हुए हैं। 1965 ई में उत्खनन कार्य आरंभ हुआ था। इन पुरातत्त्वशेषों को संग्रहीत करने के लिए कैथेडरल के सामने पुरातात्त्विक संग्रहालय निर्मित किया गया। यह विश्व में अपनी तरह की विशालतम संरचना है। प्लाज़ा के फर्श पर पीतल की पट्टियाँ लगी हुई हैं। इनसे उन स्थानों का पता चलता है जहां पर इमारतों को ढहाया गया था।

गिफ्ट शॉप –

कैथेडरल के प्रमुख हाल में गिफ्ट शॉप है। यहाँ पर कैथेडरल के स्मृतिचिन्ह मिलते हैं।

नोटरे-डेम कैथेडरल फ्रांस की राजधानी पैरिस में स्थित है। पैरिस दुनिया का खूबसूरत शहर है तथा पूरे विश्व के साथ हवाई मार्ग से जुड़ा है। हर साल लाखों पर्यटक यहाँ पर नोटरे-डेम कैथेडरल, एफिल टावर जैसी विशिष्ट कलात्मक संरचनाओं को देखने के लिए आते हैं।

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प्रमीला गुप्ता

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